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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का लोगों ने किया स्वागत, मॉनीटरिंग सही हो

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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का लोगों ने किया स्वागत, मॉनीटरिंग सही हो
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फोटो नंबर :: 37, 38, 43, 44, 45, 46
प्रदूषण कम करने के लिए दीवाली पर पटाखे जलाने के लिए दो घंटे की छूट को लोगों ने बताया सराहनीय कदम
आदेशों की पालना में पुलिस के लिए मॉनीटरिंग करना होगी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। आतिशबाजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अंबाला के लोगों ने स्वागत किया है। साथ ही इसकी मॉनीटरिंग भी सख्ती से किए जाने की उम्मीद जताई है। पुलिस के लिए इसकी मॉनीटरिंग करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। लोगों का कहना है कि इसके लिए जागरूकता पूरी तरह से की जाए, वहीं आतिशबाजी की बिक्री के लिए भी अवैध स्टालों पर सख्ती की जाए। बता दें कि बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली पर रात आठ से दस बजे तक मात्र दो घंटे पटाखे जलाने की छूट दी है जिसका सभी स्वागत कर रहे हैं।
यह है स्थिति
अंबाला में आतिशबाजी को लेकर प्रशासन द्वारा हर साल पटाखों की बिक्री के लिए जगह तय करता है, लेकिन बावजूद इसके गली-मोहल्लों में इन की बिक्री होती है। इतना ही नहीं आतिशबाजी के कारण हर साल आग लगने की दर्जन भर से ज्यादा घटनाएं सामने आ रही हैं, जबकि इस कारण से अस्थमा के मरीज भी परेशान होते हैं। जिलेभर में करीब एक करोड़ रुपये की आतिशबाजी बिक जाती है, जबकि प्रदूषण का लेवल भी कहीं अधिक हो जाता है।
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मॉनीटरिंग करने में छूटेंगे पसीने
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करवाने में पुलिस के पसीने छूटेंगे। अदालत ने आठ बजे से रात्रि दस बजे तक ही आतिशबाजी चलाने के निर्देश दिए हैं। गांवों में मॉनीटरिंग करने के लिए पुलिस को सहयोग लेना पड़ेगा। माना जा रहा है कि पुलिस के यह मॉनीटरिंग एक चुनौती की तरह रहेगी, जबकि इस पर नजर रखने के लिए अन्य संगठनों या संस्थाओं कार सहयोग लिया जा सकता है।
यह कहते हैं लोग
जिस प्रकार हम अपने प्रत्येक त्योहार हर्षोल्लास व खुशियों से मनाते हैं उसी प्रकार दिपावली भी पूर्ण हर्षोल्लास व खुशियों से मनायें। बच्चों को भी दीपावली पर्व पर दीपोत्सव के लिए उत्साहित करें ताकि आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
- नीलम शर्मा, पूर्व पार्षद, नगर परिषद अंबाला कैंट।
आतिशबाजी के कारण पर्यावरण पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ता है। नाइट्रोजन, कार्बन डाईऑक्साइड अत्यधिक मात्रा में निकलता है, जबकि अस्थमा के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यदि लोग जागरूक हो जाएं, तो बेहतर है, जबकि सामुदायिक आतिशबाजी भी एक विकल्प है।
- प्रो. सुरेश देसवाल, पर्यावरणविद।
पटाखों का शोर और प्रदूषण पर्यावरण को नुकसान तो पहुंचा रहा है। कोर्ट का यह आदेश सराहनीय है और जनता को भी इस में सहयोग देना चाहिए। यह सिर्फ आदेश ही नहीं बल्कि इसे अपना कर्तव्य मानकर भी जनता आतिशबाजी से किनारा करे।
- मोहन लाल परोचा, शिक्षक।
हर साल करोड़ों रुपये फूंक दिए जाते हैं और प्रदूषण मोल लिया जाता है। यानी हम खुद अपने को बीमार करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। अच्छा हो आतिशबाजी पर फूंकने वाले करोड़ों रुपये किसी जरूरतमंद की मदद में लगाए जाएं। कोर्ट का निर्णय सराहनीय है।
- हरविंदर सिंह नीटू, प्रधान, बाबा दीप सिंह सेवा सोसायटी अंबाला।
कोर्ट का यह रुख काफी सही है और अब सारा मामला मॉनीटरिंग पर ही टिका है। यदि मॉनीटरिंग सही हो जाती है, तो प्रदूषण का स्तर दीवाली पर कम होगा। जागरूकता ही इस समस्या का हल है।
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- रविंदर बख्शी, एडवोकेट, अंबाला।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करवाई जाएगी। हर स्तर पर पुलिस मॉनीटरिंग करेगी। यदि आदेशों की अवहेलना होती है तो नियम अनुसार जो भी कार्रवाई बनेगी वह की जाएगी।
- अनिल कुमार, डीएसपी, अंबाला कैंट।
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