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अब दाखिले के नाम पर अभिभावक परेशान

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जो स्कूल ऑप्शन में भरा ही नहीं, वह किया जा रहा अलॉट
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
नियम 134-ए के तहत एडमिशन करवाना अभिभावकों के गले की फांस बन चुका है। पहले आवेदन, फिर परीक्षा और अब स्कूलों में दाखिले के नाम पर अभिभावक परेशान रहे हैं। बीइओ ऑफिस में आए अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि नियम 134-ए के तहत आवेदन के समय उनसे पांच स्कूलों की ऑप्शन मांगी गई थी, लेकिन अब उन्हें जो स्कूल अलॉट किया गया है वह मनमर्जी से दिया गया है।
अंबाला शहर के रामनगर निवासी जतिंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने बच्चे के दूसरी कक्षा के एडमिशन के लिए पांच स्कूल भरे थे, उनके बच्चे ने परीक्षा पास कर ली। अब उन्हें दुर्गा नगर का एक स्कूल अलॉट किया गया है, जहां उनके बच्चे की एडमिशन होगी। जबकि उन्होंने फार्म में वह स्कूल भरा हीं नहीं। वह स्कूल घर से बेहद दूर है, ऐसे में बस का खर्चा काफी आ जाएगा। इसी प्रकार रामनगर के ही धीरज ने बताया कि उनके बच्चे को जिस स्कूल में एडमिशन दिया जा रहा है, वह तीसरी कक्षा तक है जबकि उन्होंने वह स्कूल भरा भी नहीं। तीसरी कक्षा के बाद अब उन्हें अपने बच्चे के लिए फिर से नियम 134-ए का फार्म भरना पड़ेगा। इस तरह की कई शिकायतें बीईओ ऑफिस में देखने को मिली। लोग अपने बच्चों के स्कूल चेंज करवाने के लिए धक्के खाते नजर आए। हालांकि इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि सारी विधि कंप्यूटरीकृत है। यह भी बता दें कि नौंवी से 12 वीं कक्षा नियम 134-ए की परीक्षा का भी रिजल्ट बीईओ ऑफिस में लगाया गया था। परिणाम देखकर अभिभावक काफी हैरान हो गए थे।
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अंबाला ब्लॉक वन में दूसरी कक्षा से आठवीं तक के लिए हुई परीक्षा में 1710 में से केवल 682 बच्चे ही पास हुए हैं। ब्लाक टू का रिजल्ट भी केवल 54.76 प्रतिशत रहा। उल्लेखनीय है कि शुरूआती दिन से ही प्राइवेट स्कूल नियम 134-ए के तहत एडमिशन का विरोध करते आ रहे हैं। पहले 25 प्रतिशत बच्चों का एडमिशन देना तय किया गया था, लेकिन बाद में मामला अदालत में जाने के बाद केवल 10 प्रतिशत बच्चों को एडमिशन देना तय किया गया।
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पास विद्यार्थियों को अलॉट किए स्कूल
उधर, नियम 134-ए के तहत परीक्षा में अंबाला ब्लॉक एक से पास हुए तीसरी कक्षा के 682 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा मेरिट के आधार पर स्कूल अलॉट किए गए। इसके साथ ही शत प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थी इशिका, इश्मीत व हिमांशी को भी उनकी मनपसंद स्कूल में स्थान दिलवाया। अब यह विद्यार्थी मनपसंद प्राइवेट स्कूल में सरकारी स्कूल की फीस के खर्चे पर पढ़ सकेंगे। इसके लिए अभिभावकों को प्राइवेट स्कूल संचालक को केवल ट्रांसपोर्टेशन चार्ज ही देेने पड़ेंगे।
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