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- कंपनियां सप्लाई नहीं कर रही नया स्टॉक

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जीएसटी से असमंजस में घिरा बाजार
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अंबाला कैंट।
जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) को लेकर अंबाला का बाजार असमंजस में आ गया है। एक जुलाई से प्रभावी हुए जीएसटी से बाजार में अनिश्चितता का माहौल उत्पन्न हो गया है। कैंट के सबसे बड़े साइंस उद्योगपतियों को यही नहीं पता कि उनके उपकरण टैक्स लगने के बाद कितने रेट पर बाजार में बिकेंगे। इस वजह से जीएसटी लागू होने के पहले दिन शनिवार को एक भी बिल नहीं कटा। साइंस के अलग-अलग एक हजार से ज्यादा उपकरण है जिनपर जीएसटी की अलग-अलग दरें है। माइक्रोस्कोप पर जहां 28 प्रतिशत जीएसटी है वहीं ग्लासवेयर पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। इसी तरह अन्य उपकरणों पर भी भिन्न-भिन्न दरें हैं। नई दर कितनी होगी इसको लेकर साइंस उद्यमी माथापच्ची कर रहे हैं। कंप्यूटर सिस्टम में उपकरणों की जीएसटी के आधार पर फीडिंग की जा रही है। अब यह फीडिंग पूरी होने के बाद ही बाजार में माल बेचा जाएगा। उम्मीद है कि सोमवार तक यह कार्य पूरा होगा।
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पनियों ने बंद की सप्लाई
इतना नहीं कन्फेक्शरी आइटमों से लेकर अन्य सामान विक्रेता अब सामान की कमी झेल रहे ंहैं। जीएसटी की वजह से कंपनियों ने पीछे से सप्लाई बंद कर दी है। आगामी दिनों में सप्लाई चालू नहीं होती तो इसका असर बाजार पर पड़ना तय है।
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(फोटो नंबर : 13)
- हनुमान मार्केट बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष और होलसेल विक्रेता विनोद जौहर बताते हैं कि बाजार कन्फेक्शरी और अन्य वस्तुओं का पुराना स्टॉक ही अभी बाजार में है। कंपनियां जीएसटी लगाकर अभी माल नहीं भेज रही है। बीते एक सप्ताह से सप्लाई रुकी हुई है। यदि जल्द नई सप्लाई नहीं आती तो बाजार में दिक्कत हो सकती है। पुराने रेट पर ही अभी सामान बाजार में बेचा जा रहा है।

(फोटो नंबर : 11)
- सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गुलाटी ने कहा कि बाजार में नया स्टॉक नहीं आ रहा। कंपनियां जीएसटी लगाकर नया सामान नहीं भेज रही है। किसी को जीएसटी का सही प्रारूप ही नहीं पता। एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग तक सही जानकारी नहीं दे रहा है। जीएसटी जल्दबाजी में लागू हुआ है जिससे नुकसान हो रहा है।
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(फोटो नंबर : 12)
- साइंस उद्यमी संजय गुप्ता ने कहा कि टेक्स प्रणाली जटिल होती जा रही है। साइंस उपकरणों पर तो स्थिति ज्यादा खराब है। यह सरल प्रक्रिया होनी चाहिए था। कौन सा साइंस उपकरण कितने में बाजार में बेचना है अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
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