जिले में कोरोना पूरी तरह से पांव पसार चुका है। शहरी क्षेत्र के अलावा अब कोई भी गांव इससे अछूता नहीं रहा। ऐसे में रोजाना कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ अस्पतालों में बेड और स्वास्थ्य सेवाओं की भी कमी खलने लगी है। जिले की वर्तमान आबादी 13 लाख से ज्यादा है। कैंट और अंबाला शहर की आबादी ही इस समय करीब छह लाख पहुंच चुकी है।
इतनी आबादी पर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए मात्र 1063 बेड की व्यवस्था ही जिला प्रशासन विभिन्न अस्पतालों व कोविड केयर सेंटरों पर सुनिश्चित कर पाया है। जिले के सरकारी अस्पतालों की बात करें तो इनमें इस समय करीब 250 मरीज भर्ती हैं और किसी भी सरकारी अस्पताल में बेड खाली नहीं है। इसी तरह प्राइवेट की भी यही स्थिति है। जिले में रोजाना करीब औसतन 14 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है।
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 3, छावनी में करीब दो टन और मुलाना अस्पताल में करीब साढ़े 3 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। इसी तरह हीलिंग टच और मिशन अस्पताल में भी औसतन करीब डेढ़-डेढ़ टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। हालांकि जिला प्रशासन ने 7 हजार से ज्यादा डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर घोषित किए हुए हैं। लेकिन इन सभी जगह पर कोविड सेंटर चलाने के लिए मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ के अलावा पर्याप्त मात्रा में सिलिंडर भी नहीं हैं।
इसी कारण इन सेंटरों की शुरुआत भी नहीं हो रही। जिले में कोरोना से 14 मई तक 377 मरीजों की जान कोरोना ले चुका है। मई माह के शुरुआती 14 दिनों में कोरोना से 136 लोगों की जान जा चुकी है। जिले के विभिन्न अस्पतालों में करीब 710 मरीज कोरोना से लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमें से करीब 660 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। अब ज्यादातर वही बेड खाली हैं जिनपर ऑक्सीजन सप्लाई नहीं है। वहीं रेडक्रॉस के माध्यम से ऑक्सीजन की होम डिलीवरी घरों में आइसोलेट मरीजों के लिए शुरू कर दी गई है। अभी तक करीब 32 लोग यह सुविधा ले चुके हैं।
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हमारे पास अभी पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन है। जिले के सभी सरकारी अस्पताल लगभग भर चुके हैं। प्राइवेट अस्पतालों में अभी कुछ बेड खाली हैं। हमने अब घरों में आइसोलेट मरीजों को भी रेडक्रॉस के माध्यम से ऑक्सीजन सप्लाई शुरू कर दी है।
डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन