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सर्दियों में धुंध और हादसों में रोड सेफ्टी हाशिये पर

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सर्दियों में धुंध और हादसों में रोड सेफ्टी हाशिये पर
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फोटो नंबर :: 01, 02, 03, 04, 27
तय होगी जिम्मेदारी, मानक पूरे नहीं तो मांगा जाएगा जवाब, कार्रवाई भी होगी
प्रशासन का जनता से आह्वान, सर्दियों में धुंध में कहीं पर रोड सेफ्टी को लेकर लापरवाही है तो बताएं कार्रवाई होगी
सर्दियों से पहले रोड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई न करने के कारण पैदा हो रही है स्थिति
कहीं से सफेद पट्टी है गायब, तो कहीं पर रोड कट, तो कहीं गलत दिशा से एंट्री
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। रोड सेफ्टी को लेकर सर्दियों के सीजन से पहले प्रशासन की सुस्ती और धुंध भरा सीजन शुरू होते ही ताबड़तोड़ निर्देशों के बावजूद धुंध भरे दिनों में सड़क पर वाहन लेकर जाना खतरे से खाली दिखाई नहीं दे रहा। तमाम निर्देशों के बाद भी स्थिति बदलते न देख अब प्रशासन विभागों की जिम्मेदारी तय कर पूछने की तैयारी में है कि निर्देशों के बाद भी धुंध में रोड सेफ्टी को लेकर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इतना ही नहीं प्रशासन अब ऐसे विभागों के अफसरों पर भी कार्रवाई करने की तैयारी में है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2016 में कुल 310 तो 2017 में 228 दुर्घटनाएं हुईं तथा साल 2018 में अब तक 206 हादसे हो चुके हैं।
यह है अभी की स्थिति
धुंध के दिनों में प्रशासन द्वारा वाहन चालकों की सेफ्टी को देखते हुए सभी मानक पूरे करने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। हाईवे व अन्य सड़कों के किनारे सफेद अथवा पीली पट्टी लगाई जाए, संकेतक लगाए जाएं। साथ ही सड़क किनारे लगे साइन बोर्ड, जिन पर सड़कों की दिशा के बारे में बताया गया है, वे भी सही किए जाएं ताकि लोगों को धुंध में यह दिखाई दें और वे रास्ता न भटक जाएं। लेकिन स्थिति है कि अधिकतर जगहों पर यह मानक पूरे नहीं हैं, जिसके चलते वाहन चालकों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। दूसरा हाईवे पर रोड कट हैं जिस कारण लोग गलत दिशा से दूसरी साइड पहुंच रहे हैं जो धुंध के दिनों में खतरनाक साबित हो सकता है।
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इन स्थानों पर है खतरा
- अंबाला-जगाधरी हाईवे पर कई स्थानों पर सफेद पट्टी नहीं है
- अंबाला-जगाधरी हाईवे पर ही सड़क किनारे गहरे गड्ढे हैं जो खतरनाक हैं।
- इसी हाईवे पर रोड कट हैं जो अवैध हैं और इसी से उल्टी दिशा से वाहन चालक आते हैं।
- हाईवे पर ही आने वाले पुल की रेलिंग तक कमजोर है और कई जगहों से उखड़ी हुई है।
- अंबाला-दिल्ली हाईवे पर शास्त्री कॉलोनी ट्रैफिक लाइट प्वाइंट खतरनाक है।
- बराड़ा दोसड़का रोड पर सफेद पट्टी इतनी फीकी है कि दिखाई ही नहीं देती।
- बराड़ा बाईपास पर धुंध के कारण सड़क दिखाई नहीं देती।
- एनएच 71 पर शुगर मिल बनौंदी के नजदीक से कई जगहों से सफेद पट्टी गायब है।
- गांवों में जाने वाली सड़कों पर न तो सफेद पट्टी है और न ही कोई संकेतक हैं।
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2012 के हादसे को नहीं भूले हैं लोग
साहा में जनवरी 2012 को हुए धुंध के दौरान हुए हादसे को लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं। इस हादसे में स्कूली वाहन व एक अन्य वाहन के बीच हुई भिड़ंत में तेरह बच्चों की मौत हुई थी, जबकि चालक की भी मौत हो गई थी। इसके बाद रोड सेफ्टी को लेकर तमाम कार्रवाई की गई, लेकिन आज फिर से व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर लौट चुकी हैं।
पुलिस के जिम्मे वाहनों पर कार्रवाई
फिलहाल पुलिस के जिम्मे ऐसे वाहनों पर कार्रवाई है जो धुंध भरे दिनों में नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं। वाहन चालकों को निर्देश हैं कि सभी वाहनों पर धुंध में दूर से दिखाई देने वाली पीली लाइटें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, ऑटो रिक्शा, बैल और घोड़ा गाड़ी इत्यादि पर रिफ्लेक्टर लगे हों। यदि वाहनों पर यह नहीं मिलते तो ऐसे वाहन चालकों के चालान भी करें।
लावारिस पशुओं से खतरा
लावारिस पशुओं से धुंध भरे सीजन में सबसे बड़ा खतरा है। धुंध में यह पशु सड़क पर घूमते दिखाई नहीं देते जिस कारण दुर्घटना हो सकती है। नगर निगम द्वारा लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर अभी तक नहीं दिया गया है।
यह कहते हैं लोग
बराड़ा के सौरभ, प्रदीप शर्मा, प्रतीक, रमन, अमित व प्रवीण कुमार का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है। सड़क पर सफेद पट्टी से धुंध में वाहन चलाना आसान होता है। कई सड़कों से सफेद पट्टी इतनी फीकी हो चुकी है कि धुंध के समय दिखाई ही नहीं देती।
कोट
रोड सेफ्टी को लेकर तो पूरा साल सक्रिय रहना चाहिए और इसकी ऑब्जर्वेशन होनी चाहिए। सिर्फ धुंध भरे दिनों से कुछ पहले यदि कवायद शुरू की जाती है तो यह एक तरह से लापरवाही है। यदि पूरा साल इस पर काम हो तो धुंध के दिनों में काफी आसानी हो जाती है।
-सुनील ठाकुर, एक्स मेंबर, ग्रीवेंसिज कमेटी अंबाला।
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हर विभाग अपनी जिम्मेदारी निभा नहीं रहा है जिस कारण रोड सेफ्टी को लेकर सिर्फ निर्देश जारी होते हैं। रात को यदि हाईवे पर आवाजाही करनी हो तो पता चलता है कि कहां पर कितना खतरा है। निर्देश तो जारी हो जाते हैं लेकिन इन पर काम नहीं और न ही इसकी निगरानी की जाती है। खतरा तो जनता झेलती है।
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-आनंद मोहन शुक्ला, अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी संग्राम एवं जनकल्याण समिति हरियाणा।
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धुंध भरे दिनों को लेकर प्रशासन हर उस विभाग से जवाब मांगेगा, जिसके तहत सड़कें आ रही हैं। साथ ही पुलिस भी वाहन चालकों पर नजर रखेगी कि उन्होंने धुंध भरे दिनों को लेकर सुरक्षा मानक अपनाए हैं या नहीं। यदि कहीं पर कमी मिलती है तो संबंधित विभाग से जवाब मांगा जाएगा और कार्रवाई भी होगी। जनता भी बताए कहां पर कमी है, उस पर भी काम किया जाएगा।
-कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी, अंबाला।
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