राजकीय स्कूलों की 246 बेटियां बनेगी ‘होनहार’
छात्राओं ने पूछे उपायुक्त से सवाल, होनहार कार्यक्रम के तहत उपायुक्त कार्यालय की कार्यप्रणाली को छात्राओं ने देखा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। राजकीय विद्यालयों की मेधावी बेटियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए उचित मार्गदर्शन हेतु ‘होनहार’ नामक कार्यक्रम शुरू किया गया है। उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ की पहल पर शिक्षा विभाग द्वारा यह कार्यक्रम आरंभ किया गया है। वीरवार को उपायुक्त ने अपने कार्यालय से इस कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। राजकीय विद्यालय माजरी, जलबेड़ा और प्रेम नगर की आईएएस बनने की इच्छा रखने वाली तीन बेटियों ने वीरवार पूरा दिन उपायुक्त के साथ उनके कार्यालय की कार्यप्रणाली का व्यवहारिक ज्ञान हासिल किया।
इस कार्यक्रम में जिला के 82 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की 11वीं कक्षा की उन 246 बेटियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने 10वीं कक्षा के परिणाम में विद्यालय स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल किया है। इन बेटियों में से आईएएस, आईपीएस, एचसीएस अधिकारी, सेना अधिकारी, डॉक्टर, अध्यापक सहित अन्य क्षेत्रों में उनके कॅरियर के मार्गदर्शन के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ उनके अध्यापक की मौजूदगी में पूरे दिन की दिनचर्या को समझने का अवसर दिया जाएगा। उपायुक्त ने इस अवसर पर बताया कि राजकीय विद्यालयों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपनी मेहनत के बल पर अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद उचित मार्गदर्शन के अभाव में अच्छा कॅरियर चुनने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे बच्चों को कॅरियर चुनने के लिए उचित मार्गदर्शन मिलेगा और अधिकारियों को दिनचर्या को समझने, सरकार द्वारा इन अधिकारियों को दी जा रही सुविधाओं इत्यादि से ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने और लक्ष्य को हासिल करने के लिए और कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा भी मिलेगी। इस मौके पर निगम आयुक्त सत्येन्द्र दूहन, संयुक्त आयुक्त गगनदीप सिंह, एसडीएम सुभाष चंद्र सिहाग, जीएम रोडवेज कुलधीर सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी उमा शर्मा व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उपायुक्त से पूछे विद्यार्थियों से सवाल
इस मौके पर राजकीय विद्यालय माजरी की नीरज और राजकीय विद्यालय जलबेड़ा की सोनिया ने आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने उपायुक्त से पूछा कि इस कॅरियर के लिए 12वीं के बाद किन विषयों का चयन किया जाना चाहिए, इसके लिए कितनी मेहनत की आवश्यकता है और जब वह (उपायुक्त) आईएएस अधिकारी बनी थी, तो उनके परिजनों व रिश्तेदारों द्वारा उन्हें आगे पढ़ने में किस तरह प्रोत्साहित किया। उपायुक्त ने न केवल इन बच्चियों के प्रश्नों का उत्तर दिया बल्कि उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित किया कि वह छात्र जीवन में अपना लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी शामिल हों। इससें आत्मविश्वास बढ़ता है और एकाग्रता के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।