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1.95 लाख लोग नहीं बनवा पाए आयुष्मान कार्ड

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गांव बलाना में आयुष्मान कार्ड बनाते हुए वीएलई - फोटो : Ambala
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प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज की सुविधा के बावजूद जिले में 1 लाख 95 हजार लाभार्थियों के यह कार्ड नहीं बन पाए हैं। बेशक जिला प्रशासन ने इस लक्ष्य को 15 मार्च तक पूरा करने का एलान कर दिया है, जोकि किसी भी हाल में संभव नहीं है। क्योंकि एक सप्ताह में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग के पास साधन और संसाधन दोनों समिति हैं। इतने लोग अभी तक इस सुविधा से कैसे वंचित रह गए यह हर किसी की समझ से बाहर है। यह स्थिति तब है जब जिला नागरिक अस्पताल से लेकर सीएचसी स्तर पर आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग रहीं हैं।
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हर ग्राम स्तर पर शुरू की सुविधा
अब जिलेभर की सभी सीएससी पर वीएलई ने भी यह सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं। जिले में इस समय करीब 450 सीएससी पर वीएलई एक्टिव हैं। इनमें ग्राम स्तर पर 408 वीएलई अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अलबत्ता अब उम्मीद लगाई जा रही है कि लोगों को राहत मिलेगी। जिले में कुल 3 लाख 12 हजार लाभार्थियों के कार्ड बनाए जाने थे। प्रशासन ने 15 मार्च तक इसे कवर करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन अभी तक करीब 1 लाख 17 हजार कार्ड ही बन पाए हैं। सभी सीएससी पर कार्ड बनवाने की सुविधा एकदम निशुल्क है।
कैसे बनवाएं कार्ड
जिन लाभार्थी के पास मुख्यमंत्री द्वारा भेजा गया पत्र पहुंचा है वह उसके साथ अपने अन्य दस्तावेज लेकर सीएससी या नागरिक अस्पताल में पहुंचकर कार्ड बनवा सकते हैं, जिनके पास यह नहीं है वह अपना राशन कार्ड ले जाकर सीएससी से यह पता करवा सकते हैं कि उनका लिस्ट में नाम है या नहीं। बता दें इस योजना का लाभ पहले लिस्ट जारी हुए उपभोक्ता ही ले सकते हैं। सरकार ने किसी भी उपभोक्ता का नया नाम लिस्ट में शामिल नहीं किया है।
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अब ये आ रही दिक्कत
दरअसल, आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण साइट स्लो रहती है। इसीलिए घंटों लाइन में लगने के बाद ही यह कार्ड बन पा रहे हैं। कई बार तो साइट इतनी धीमी हो जाती है कि डाटा ही अपलोड नहीं हो पाता। बता दें कि गत वर्ष कोरोना के चलते ज्यादातर लोग कार्ड नहीं बनवा पाए थे।
क्या हैं फायदे
इस योजना के तहत लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का इलाज बिना किसी प्रीमियम के, पैनल में शामिल प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलता है। जिले में इस योजना के तहत 28 प्राइवेट और सात सरकारी अस्पताल शामिल किए गए हैं। 28 निजी अस्पतालों के माध्यम से 7000 लाभार्थियों इस योजना के तहत 10.50 करोड़ रुपये की राशि का इलाज ले चुके हैं। इसी प्रकार सात सरकारी अस्पतालों में अब तक 3412 लाभार्थियों इलाज करवा चुके हैं। लगभग 6 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि इलाज वहन की गई है। सामान्य बीमारियों के अलावा डायलिसिस और हृदय रोगियों को भी छावनी नागरिक अस्पताल में इस सुविधा के तहत एकदम निशुल्क इलाज मिल रहा है। घुटने और कूल्हे के मरीजों को भी अब इसी श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इनको भी आयुष्मान से नागरिक अस्पताल में इलाज मिलने लगा है।
इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को मिलेगी संजीवनी
अब कैंसर को भी इसी श्रेणी में लाने की तैयार चल रही है। गोडे बदलने जैसे महंगा इलाज भी इस योजना में जल्द ही शामिल कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं एसीएल रिपयेरिंग का काम भी शुरू कर दिया गया, जोकि गोडे से संबंधित मरीजों से जुड़ा है। यह सभी सुविधाएं इसी माह के भीतर नागरिक अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों को निशुल्क मिलेंगी।
क्यों नहीं बन सके आयुष्मान योजना के कार्ड
1. आधार से वेरिफिकेशन नहीं होना: आधार कार्ड और राशन कार्ड में नाम अलग होने के कारण कुछ लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड वेरिफाई नहीं हो सके।
2. केवाईसी नहीं होने के कारण भी यह कार्ड नहीं बन पाए। अधिक उम्र के बुजुर्गों के साथ ऐसी ज्यादा दिक्कत आ रही हैं।
3. कोरोना काल के चलते करीब चार महीने तक बोयोमेट्रिक डिवाइज को बंद रखने के आदेश जारी किए गए थे। इसीलिए आयुष्मान कार्ड इस अवधि नहीं बन गए।
4. प्रधानमंत्री से लाभार्थियों के लिए पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे। यहां से जिले में आए लेकिन विभिन्न कारणों से लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाए। इसीलिए लोगों को यही नहीं पता कि उनका नाम भी सूची में शामिल है।
5. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास पत्र तो पहुंच गए लेकिन उन्हें पढ़ना ही नहीं आता कि उसमें लिखा क्या है?
6. बहुत से लोग ऐसे हैं जोकि यह सोचकर बैठे हैं कि जरूरत पड़ेगी तो कार्ड बनवा लेंगे।
7. कोरोना से पहले सीएचसी स्तर पर कैंप लगाकर रोजाना 1500 तक कार्ड बनाए गए, लेकिन कोरोना के चलते कैंप बंद कर दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने झोंकी ताकत 1200 कर्मचारी मैदान में उतारे
स्वास्थ्य विभाग ने 15 मार्च तक लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसमें 845 आशाएं, 13 आयुष्मान मित्र, 4 ब्लॉक आशा समन्वयक, 25 आशा फैसिलिटेटर और डॉक्टर व एएनएम को जिम्मा सौंपा गया है।
60 प्रतिशत कार्ड अकेले एक मित्र ने बनवाए
जिले के 13 आयुष्मान मित्रों द्वारा बनाए गए कुल कार्ड में से 60 प्रतिशत कार्ड आयुष्मान मित्र विशाल ने ही बनाए हैं, जबकि अन्य 12 आयुष्मान मित्र मात्र 40 प्रतिशत कार्ड बनवा सके। विशाल ने यह कार्य मुलाना सीएचसी के एसएमओ डॉ. कुलदीप के मार्गदर्शन में किया। बता दें कि आयुष्मान मित्रों को इसके लिए मात्र पांच हजार रुपये ही प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। ऐसे में ज्यादा काम करना उनके लिए भी चुनौती से कम नहीं है।
निश्चित तौर पर संख्या बहुत कम है। ज्यादातर लोग यह सोच रहे हैं जरूरत पड़ने पर ही कार्ड बनवा लेंगे। साइट की भी कुछ दिक्कत है। कुछ लोगों तक पत्र भी नहीं पहुंच पाए। फिर भी हम पूरी ताकत से लगे हैं। रविवार को हमने 517 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए हैं, जोकि पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। पूरे प्रदेशभर में रविवार को 4 हजार 588 कार्ड बने हैं। पहली मार्च को केवल 50 कार्ड बने थे और उस दिन पूरे प्रदेश 1391 कार्ड बने थे। दो मार्च को हमने 84 कार्ड, 3 मार्च को 88, चार मार्च 173 और 5 मार्च को 82 कार्ड बनाकर दूसरा स्थान पाया था।
- डॉ. सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी।
ग्राम स्तर पर सभी पंचायतों में 408 स्थानों पर आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी शहरी क्षेत्रों में वार्ड लेवल पर अलग से व्यवस्था करवाई गई है। यदि कोई सीएससी संचालक पैसे मांगता है तो उसके खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
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- विवेक शर्मा, डीएम सीएससी।
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