हरियाणा के कई जिले गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में अक्सर रहते हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण कितना है, यह जानना जरूरी होता है, ताकि बचाव के लिए लोग एहतियात कदम उठा सकें...मगर हरियाणा में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क ही ठप पड़ा है। राज्य के विभिन्न जिलों में लगे 29 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन पिछले छह महीने से बेकार हैं। इन स्टेशनों में वायु प्रदूषण का स्तर दर्ज नहीं हो रहा। इन सभी स्टेशनों के टेंडर समाप्त हो गए हैं और विभाग नए टेंडर जारी नहीं कर सका। छह महीने के बाद विभाग ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू की है। अब इन स्टेशनों को शुरू होने में करीब एक से डेढ़ महीने का वक्त लग सकता है।
शहरों में वायु प्रदूषण को नापने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 29 निगरानी स्टेशन बनाए गए हैं। इन स्टेशनों से ही वायु प्रदूषण का डाटा दर्ज होता है। पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने बताया, इन सभी स्टेशनों की टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जून तक ये सभी स्टेशन शुरू हो जाएं। इसमें देरी क्यों हुई है, इस बारे में अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने भी माना है कि यह बड़ी चूक है। स्टेशनों की देखरेख करने वाली कंपनी का जब अनुबंध खत्म होने वाला था तो उससे पहले ही यह टेंडर हो जाने चाहिए थे। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि विभाग ने पहले तय किया था कि मौजूदा कंपनी का टेंडर आगे बढ़ा दिया जाए। बाद में तय हुआ कि नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया जारी की जाए। इस वजह से इसमें समय लग गया है। अंबाला, हिसार, भिवानी का स्टेशन दिसंबर में ही बंद हो गया था, जबकि रोहतक, बहादुरगढ़ व झज्जर का जनवरी में।
वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन का चलना क्यों है जरूरी
पिछले दिनों दक्षिण हरियाणा में धूल का बड़ा गुबार छाया हुआ था। दिल्ली समेत सभी एनसीआर में शामिल जिलों में वायु गुणवत्ता का स्तर बढ़ गया था। दिल्ली व नोएडा में विशेषज्ञों ने इस बारे में एहतियात जारी की मगर हरियाणा में इस तरह की कोई चेतावनी नहीं जारी की गई। यदि वायु प्रदूषण के स्तर का पता चलता है कि लोग खुद से एहतियात बरतने लगते। हरियाणा में गेहूं की नाड़ भी खूब जलती है। इससे भी वायु प्रदूषण बढ़ता है, मगर इस बार पता नहीं चल सका कि किस जिले का कितना प्रदूषण है।
पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन व स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल ने बताया, वायु गुणवत्ता का डाटा नहीं होने से डाटा क्वालिटी में गैप आ सकता है। इससे वार्षिक ट्रेंड को समझने में दिक्कत आ सकती है। वहीं, आम जनता को समय पर कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी कर सकते हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण का डाटा होना जरूरी है।
दिवाली के बाद इन जिलों में एक्यूआई 350 से ऊपर रहता है
दिवाली के बाद हरियाणा के नौ जिलों में वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। बीते साल गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, जींद, रेवाड़ी, झज्जर, सोनीपत, बहादुरगढ़, सिरसा, फतेहाबाद में औसत एक्यूआई 350 से ज्यादा दर्ज किया गया था। नवंबर के महीने में गुरुग्राम, फरीदाबाद में तीन दिन एक्यूआई 500 से ऊपर दर्ज किया गया था। वायु प्रदूषण की वजह से बाद में कुछ जिलों में स्कूल भी बंद करने पड़े थे। ऐसे में हरियाणा जैसे राज्य में अगर प्रदूषण के स्तर का पता ही नहीं होगा तो एहतियाती कदम कैसे उठाए जाएंगे।
पिछले साल सबसे दूषित शहरों में राज्य के भी दो
दिवाली के वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पिछले साल हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, जींद, रेवाड़ी, झज्जर, सोनीपत, बहादुरगढ़, सिरसा, रोहतक सबसे प्रदूषित शहर में शामिल थे। इन शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 से 500 तक दर्ज किया गया था। इनमें सिर्फ गुरुग्राम में ही एयर क्वालिटी स्टेशन चल रहा है। वहीं, स्विस वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी आईक्यूएयर की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे प्रदूषित 20 शहरों में हरियाणा के दो शहर में शामिल थे, जिनमें गुरुग्राम और फरीदाबाद शामिल थे।