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Gujarat Election: कांग्रेस ने गुजरात की राजनीतिक प्रयोगशाला में किया यह बड़ा प्रयोग! अब ऐसे नतीजों की उम्मीद

Mon, 21 Nov 2022 03:54 PM IST
Harendra Chaudhary अहमदाबाद, गुजरात से आशीष तिवारी।

सार

Gujarat Election: कांग्रेस ने इस बार उदयपुर में आयोजित हुए चिंतन शिविर की खास रणनीति को गुजरात में उतारा है। कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चिंतन शिविर में यही हुआ था कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता और हर चुनाव लड़ने वाले नेता को ही बड़ा चेहरा प्रोजेक्ट किया जाना है...
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Gujarat Election: Congress - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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गुजरात को राजनीति की प्रयोगशाला कहा जाता है। सियासी गलियारों में माना जाता है कि गुजरात की इस प्रयोगशाला से निकलने वाली राजनीति में भारतीय जनता पार्टी को महारत हासिल है। लेकिन इस बार तो गुजरात की इस राजनीतिक प्रयोगशाला में कांग्रेस ने भी बड़ा प्रयोग कर डाला। दरअसल यह प्रयोग कुछ और नहीं बल्कि 'वन मैन शो' के प्रभाव को समाप्त करने की दिशा में किया गया बड़ा प्रयोग है। गुजरात में कांग्रेस ने इसी प्रयोग के तहत कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे राहुल गांधी को चुनावी मैदान में अन्य पार्टियों के बड़े चेहरों की तुलना में बहुत कम उतारा है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है ऐसा करके पार्टी को गुजरात में न सिर्फ मजबूत किया जाना है, बल्कि वन मैन शो के प्रभाव को खत्म करके पार्टी के हर प्रत्याशी और ब्लॉक स्तर तक के पदाधिकारियों को चेहरा बनाने की योजना है। गुजरात चुनावों में कांग्रेस की ओर से किया जाने वाला यह प्रयोग अगर सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में पार्टी को अनुमान है कि उनका संगठनात्मक ढांचा देश में सबसे मजबूत होगा।

स्थानीय नेता का जनता से सीधा कनेक्शन

दरअसल कांग्रेस ने इस बार उदयपुर में आयोजित हुए चिंतन शिविर की खास रणनीति को गुजरात में उतारा है। कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चिंतन शिविर में यही हुआ था कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता और हर चुनाव लड़ने वाले नेता को ही बड़ा चेहरा प्रोजेक्ट किया जाना है। ताकि वह अपने विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में रहकर किसी बड़े चेहरे पर मोहताज न रह सके। ऐसा करके स्थानीय स्तर पर न सिर्फ पार्टी को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि 'वन मैन शो' या 'वन फेस' की होने वाली मांग से उबारा जा सके। पार्टी नेताओं का मानना है कि पार्टी के बड़े चेहरे बड़े नाम और कद्दावर नेता अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर जनता से रूबरू होकर उनको पार्टी की विचारधारा से अवगत तो करा सकते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर के नेता से जो जनता का सीधा संवाद और रिश्ता होता है वह एक अलग ही होता है। यही वजह रही कि पार्टी ने गुजरात में अपने तमाम बड़े नेताओं को तो उतारा, लेकिन गांधी परिवार से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की रैलियों में हाथ पीछे खींच लिया। पार्टी के नेता कहते हैं कि इसका मकसद स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने का है।

बाकी दलों में 'वन मैन शो'

गुजरात कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अगर आप गुजरात में बीते कुछ समय में हुई सभी पार्टियों की रैली, जनसभा और नुक्कड़ सभाओं को देखेंगे, तो पाएंगे कि कांग्रेस को छोड़कर सभी विरोधी पार्टियों ने वन मैन शो की छवि को बरकरार रखा है। आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल जनसभा और रैलियों और रोड शो में शिरकत कर रहे हैं। जबकि भाजपा की ओर से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार गुजरात में दौरा कर रहे हैं। कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि उनकी पार्टी के भी सभी कद्दावर नेता लगातार राज्य में डटे हुए हैं, लेकिन राहुल और प्रियंका की रैलियों में हाथ थोड़ा तंग रखा गया है। वह कहते हैं कि गुजरात में इस वक्त कांग्रेस को लेकर के जो भी माहौल बना हुआ है, वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आए बगैर बना हुआ है। आज सोमवार को राहुल गांधी की गुजरात में दो जनसभाएं हो रही हैं। उनका कहना है यह कांग्रेस पार्टी की अपनी ताकत है कि वह अपने प्रदेश स्तर के नेता और कार्यकर्ताओं के बल पर मजबूती के साथ न सिर्फ चुनावी मैदान में है बल्कि मजबूत स्थिति में चुनाव लड़ रही है।

संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करते हैं ऐसे प्रयोग

गुजरात की राजनीति के विश्लेषक कांजीभाई ढोलकिया कहते हैं कि यह बात तो सच है कि कांग्रेस ने गुजरात में जो माहौल बनाया है, वह बगैर गांधी परिवार के चेहरे के आए बगैर ही बनाया है। कांजीभाई का कहना है कि कांग्रेस की ओर से अगर यह कोई प्रयोग किया गया है, तो निश्चित तौर पर ऐसे प्रयोग संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करते हैं। क्योंकि जब आप लगातार केंद्रीय नेतृत्व और बड़े चेहरों को ऐसे चुनाव प्रचार में लेकर आते हैं, जहां पर आपका अपना स्थानीय संगठनात्मक ढांचा बहुत मजबूत ना हो, तो उसका असर उतना प्रभावी नहीं होता है। राजनीतिक लिहाज से किसी भी राज्य में मजबूती से चुनाव लड़ने के लिए सबसे प्रभावी तरीका यही होता है कि आपका स्थानीय संगठनात्मक ढांचा सबसे ज्यादा मजबूत हो। चूंकि गुजरात में कांग्रेस बीते तकरीबन तीन दशक से सत्ता से बाहर है। इसलिए उसके संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना पार्टी की पहली प्राथमिकता है। और इस पहली प्राथमिकता के लिहाज से स्थानीय लोगों को आगे करना और उनको चेहरा बनाना रणनीति का हिस्सा हो सकता है। गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह पूरा रणनीति का हिस्सा ही है।

कांग्रेस ने स्थानीय नेताओं को दी मजबूती

कच्छ की भुज विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी अर्जुन भाई कहते हैं कि वह तो लगातार इलाकों में दौड़-दौड़ कर पसीना बहा रहे हैं। उनके साथ जनता भी जुड़ रही है और हर स्तर के नेता भी जुड़ रहे हैं। राहुल गांधी का गुजरात में रैलियां करना या नहीं करना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है स्थानीय स्तर के नेताओं से कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं का जुड़ना। जो बात कांग्रेस प्रत्याशी अर्जुन भाई ने कही, वही बात यहां से कोसों मीलों दूर समुद्री इलाके के पोरबंदर विधानसभा में कांग्रेस के कार्यकर्ता हीरेन राबरिया भी कहते हैं। हीरेन कहते हैं कि यह बात बिल्कुल सच है कि कांग्रेस गुजरात में बीते 27 सालों से सत्ता में नहीं है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कांग्रेस का अपना संगठनात्मक ढांचा नहीं है या उसका अपना वोट बैंक नहीं है। वह कहते हैं कि कांग्रेस की रणनीति बहुत सही है कि वह अपने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक स्तर पर मजबूत करने के लिए उनके चेहरों को ही आगे करें। उनका कहना है कि कांग्रेस इस वक्त 27 साल से सत्ता पर राज करने वाली भाजपा से मजबूती से मुकाबला कर रही है। इसकी प्रमुख वजह कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की मजबूती और उनके नाम को आगे किए जाना ही है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि गुजरात में अगर इस तरीके का प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले दिनों में कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा देश के अलग-अलग प्रांतों में भी ऐसे ही मजबूत होता रहेगा।

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