Gujarat Election: बुलडोजर पर योगी आदित्यनाथ का पोस्टर
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जब देश में भाजपा गुजरात मॉडल लागू करने की बात करती रही हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद गाहे-बगाहे गुजरात मॉडल को प्रमोट करते हों। उसी गुजरात के व्यापारिक शहर सूरत की हवा में उत्तर प्रदेश और योगी मॉडल की धुन सुनाई दे रही है। चुनावी सरगर्मियों के बीच सूरत के लोग अपने ही गुजरात मॉडल से ऊबे से नजर आ रहे हैं। तमाम लोग जी भरकर योगी राज की तारीफ और उसी स्टाइल में गुजरात में कानून व्यवस्था को लागू करने की वकालत करते सुनाई दे रहे हैं।
योगी का यूपी का मॉडल राज्य की जरूरत
डायमंड सिटी के रुप में पहचाने जाने वाले सूरत के लोगों की प्रमुख चिंता कानून व्यवस्था को लेकर नजर आ रही है। अमर उजाला डिजिटल ने जब सूरत की सड़कों, गलियों की खाक छानी और लोगों से बात की, तो उन्होंने कहा कि भाजपा का गुजरात मॉडल देखते हुए वर्षों निकाल दिए। लेकिन अब योगी का यूपी का मॉडल राज्य की जरूरत है। दरअसल, सूरत में बड़े पैमाने पर प्रवासी जनसंख्या निवासी करती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश और बिहार का है। भाषाई भेदभाव और रंगदारी इन प्रवासियों से लेकर तमाम कारोबारियों की परेशानी बनते जा रही है।
सूरत भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है। पूरे सूरत जिले की सभी 16 सीटों पर पिछली बार भाजपा ने 15 सीटें जीती थीं। लेकिन अब भाजपा के इस गढ़ में आम आदमी पार्टी ने सेंध लगाने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने महानगर पालिका के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके बाद से ही इस शहर में सीधी टक्कर भाजपा और आप के बीच बताई जा रही है। पार्टी ने अपने इस किले को बचाने के लिए स्टार प्रचारकों की फौज मैदान में उतार दी है। इसमें यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर सांसद और गायक मनोज तिवारी, सांसद रविकिशन तक शामिल हैं। पार्टी का मुख्य फोकस हिंदी भाषी मतदाताओं को साधना है। लेकिन कोरोना काल के बाद से ही सूरत में उत्तर भारतीय वोटर का बड़ा तबका भाजपा से नाराज चल रहा है। उत्तर भारतीयों का आरोप है कि सरकार ने कोरोना काल में कोई काम नहीं किया। लोगों की इसी नाराजगी का फायदा आम आदमी पार्टी ने उठाया है। पार्टी ने कई जगह लोगों को स्थानीय और समाज में पैठ रखने वाले लोगों को उम्मीदवार बनाया है। इससे कुछ सीटों पर मुकाबला रोचक हो गया है।
भाजपा से क्यों नाराज है उत्तर भारतीय वोट बैंक
अमर उजाला से चर्चा में पांडेसरा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पूरे सूरत में हिंदी भाषी होने का बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। सरकारी कार्यालय में अगर हम हिंदी बोलते हैं, तो कर्मचारी हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। जबकि अगर कोई गुजराती व्यक्ति होगा तो उसका काम जल्दी हो जाता है। ऑटो चालक रवि का कहना है कि कोरोना काल में सरकार ने घोषणा की थी कि 10 हजार रुपये सभी को दिया जाएगा। उसके लिए हमसे 100 रुपये लेकर फार्म भरवाए गए थे। 10 हजार रुपये मिलना तो दूर हमारे 100 रुपये अलग चले गए।
इसलिए चाह रहे योगी मॉडल
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई जगह कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब है। कई क्षेत्र ऐसे जहां लोग सीधे रंगदारी मांगते हुए नजर आते हैं। अगर कोई सवाल उठाता है, तो उसके साथ ये लोग लड़ाई-झगड़ा करते हैं। हमारे सीएम भूपेंद्र पटेल को भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से सीख लेनी चाहिए। हमने अब तक गुजरात मॉडल को देख लिया, अब गुजरात में योगी मॉडल की जरूरत है।
इन कारणों से वोट देंगे भाजपा को
सूरत की उधना विधासभा के हिंदी भाषी लोग योगी के नाम पर वोट देना चाहते हैं। हिंदी भाषी वोटरों का मानना है कि योगी जैसे नेता गुजरात में चाहिए, इसलिए भाजपा को वोट करेंगे। वोटर शिवाकांत गुप्ता कहते हैं कि योगी ने सूरत में आकर जनसभा की यह बड़ी बात है। हम इस बार ये नहीं देख रहे हैं कि उम्मीदवार कौन है, बल्कि हम योगी के नाम पर अपना वोट डालेंगे। जैसे राम मंदिर का निर्माण हुआ, काशी कॉरिडोर बना इसलिए हम योगी को देखकर ही वोट कर रहे हैं।