मिठाइयों के बिना कोई भी त्योहार पूरा नहीं हो पाता है। लेकिन, मिलावटखोर सिर्फ मुनाफा के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते हैं। मावे में जमकर मिलावट करते हैं। वैसे खाद्य सुरक्षा विभाग इसके खिलाफ अभियान चलाता है, लेकिन आप घर में ही मावे में मिलावट की पहचान कर सकते हैं।
दरअसल, पर्व में मावा की डिमांड काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में मावे और मिठाइयों में मिलावट का धंधा बढ़ जाता है और मिलावटखोरों की चांदी हो जाती है।
जानकार बताते हैं कि मिलावटी मावा को तैयार करने के लिए सिंथेटिक दूध का इस्तेमाल किया जाता है। मिलावटी मावे के सेवन से कैंसर होने का डर रहता है। इतना ही नहीं, नकली मावा के सेवन से लीवर में सूजन और आंतों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।