कोरोना से लड़ने में प्राणायाम व योग को वरीयता देनी होगी ः कुलपति गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा आयोजित किया गया ऑनलाइइन व्याख्यानमाला अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की ओर से ऑनलाइन फेसबुक लाइव व्याख्यानमाला आयोजित किया गया। जिसका उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर विजय कृष्ण सिंह ने किया। कुलपति ने कहा कि कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी का अभी तक कोई इलाज नहीं है, सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर ही इस महामारी को हराया जा सकता है। जिसमें योग और आयुर्वेद मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता को इस महामारी से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान कर सकता है। आज हमें हेल्थ और हाइजीन के साथ साथ प्राणायाम और योग को भी अपने जीवन में वरीयता देनी होगी। भारत की संस्कृति की पहचान योग से है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योग और आयुर्वेद का महत्वपूर्ण योगदान है। शोध पीठ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कुलपति ने कहा कि प्राचीन काल से ही नाथपंथ में योग की परंपरा रही है। नाथ साहित्य एवंं नाथ दर्शन को जन-जन तक प्रसारित एवं जनोपयोगी बनाने के लिए शोध पीठ कृतसंकल्प है। शोध पीठ द्वारा नाथपंथ विश्वकोश का निर्माण किया जा रहा है। विशेष कार्याधिकारी प्रो रवि शंकर सिंह ने आभार व्यक्त किया। सफल आयोजन में संयोजक डॉ पवन कुमार, डॉ गौरी शंकर चौहान, डॉ निखिल कुमार, डॉ सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ तूलिका मिश्रा, डॉ आरती यादव एवं डॉ सर्वेश कुमार का सहयोग रहा। - कल भी होगा व्याख्यान महायोगी श्री गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ द्वारा आयोजित ऑनलाइन फेसबुक लाइव व्याख्यानमाला के क्रम में अगला विशिष्ट व्याख्यान 20 मई को गोरखपुर विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो डी. केसिंह का पर्यावरण ,अध्यात्म जींन और समाज विषय पर होगा।