गोरखपुर। बिजली निगम बक्शीपुर के स्पेशल ऑडिट में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच करने वाली टीम ने बिलों को गलत तरीके से संशोधित और मीटर की रीडिंग को कई बार बदले जाने का मामला पकड़ा है। इसके अलावा कई परिसर में कम अंतराल पर मीटर बदल दिए गए। ये मीटर बदले जाने के बाद रिकार्ड में भी नहीं मिले। वहीं, जांच में फंसे कुछ कर्मचारी खुद को निर्दोष ठहराते हुए बक्शीपुर खंड में टहलते दिखते हैं।
दरअसल, बिजली निगम बक्शीपुर खंड में बिलिंग और मीटर परीक्षण खंड में दो वर्ष के दौरान हुई गड़बड़ी की जांच चल रही है। जांच करने वाली टीम के सदस्यों ने पाया कि अगस्त 2017 से अगस्त 19 तक के बीच बड़ी संख्या में गड़बड़ी हुई थी। मीटर की रीडिंग बदलने में काफी खामी मिली। जैसे, किसी उपभोक्ता के परिसर पर लगे मीटर में 12 हजार यूनिट बिजली खपत की गई। 4 हजार यूनिट खपत का बिजली बिल बना और उपभोक्ता ने जमा भी कर दिया। लेकिन, इसके बाद औसत बिल ही जमा करते गया और मीटर में रीडिंग 12 हजार हो गई। 8 हजार रीडिंग स्टोर हो गई, जिसका बिल न तो बना और न ही जमा किया गया। इस रीडिंग को खपाने के लिए संबंधित अधिकारी ने अपनी आईडी से ही नया बिल 1201 रीडिंग से बना दिया। ऐसे में 8 हजार रीडिंग का बिजली बिल नहीं बन सका और उपभोक्ता को लाभ मिल गया। ऐसे ही मामले जांच में अभी तक सामने आए हैं। मुख्य अभियंता आशु कालिया ने बताया कि मामले में स्पेशल ऑडिट की जांच चल रही है। रिपोर्ट के बाद ही इसपर निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या था मामला
पांच वर्ष पहले एक उपभोक्ता ने शिकायती पत्र और कई कनेक्शनों का हवाला खाता संख्या के साथ लिखते हुए गड़बड़ी की शिकायत प्रबंध निदेशक से की थी। पहले मामले में विजिलेंस ने जांच की। इसके बाद प्राथमिक रिपोर्ट पर 2017 अगस्त से 2019 अगस्त तक के बीच बक्शीपुर खंड में हुई गड़बड़ी के जांच के लिए चेयरमैन ने स्पेशल ऑडिट की टीम गठित की थी। इसमें चार लेखाकारों की टीम बनाई गई थी।