मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वीपी सिंह का कहना है कि इस बीमारी के जिले में अभी तक फैलने की सूचना नही है। इसका इलाज लक्षण के आधार पर किया जाता है। यदि किसी पशु में लक्षण की संभावना है तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से दूर करें। इस बीमारी की रोकथाम के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विकास भवन में किया गया है। सभी पशु चिकित्सकों को बुलाकर इसके बारे में जानकारी दी जा रही है। जहां पशु रहते हैं, वहां साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
ये होते हैं लक्षण
लंपी बीमारी गो-वंश को प्रभावित करती है। देशी गो-वंश की तुलना में संकर नस्ल की गायों में इस रोग के फैलने की संभावना अधिक रहती है। लंपी होने पर पशु को बुखार होता है। शरीर में कई स्थानों पर गांठ पड़ जाते हैं। बाद में गांठ पक कर फोड़ा का रूप ले लेते हैं। इसके फैलने का मुख्य कारण मच्छर, मक्खी व किलनी है। यह रोग गंदगी की वजह से भी पशुओं में होता है। बीमारी का प्रसार संक्रमित पशु के नाक से स्राव, दूषित आहार और पानी से भी होता है।