सौरमंडल के ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
ज्योतिष के अनुसार सौर मंडल में नौ ग्रह हैं और 27 नक्षत्र। इन सभी का अलग-अलग महत्व होता है। इन ग्रह और नक्षत्रों का लोगों के उपर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों तरह से ही प्रभाव पड़ता है। अगर किसी की कुंडली में कोई ग्रह परेशान कर रहा हो तो उसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए उन ग्रहों से संबंधित पेड़-पौधें की पूजा और जल देने से सब कुछ ठीक होने लगता है। पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, आइए जानते हैं नवग्रह एवं नक्षत्रों के लिहाज से किन पेड़-पौधों के पूजन-अर्चन से इनके दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
नवग्रहों के पेड़-पौधे...
- सूर्यः लाल गुलाब, मदार व कनेर।
- गुरू: केला, बेल व गैंदी।
- शुक्रः गूलर, कनैर व तुलसी।
- शनिः शमी व शमा बैजंती।
- चंद्रः पलाश, कनेर व चमेली।
- बुधः अपामार्ग, पान व बेला।
- मंगलः गुडहल, खैर व लाल चंदन।
- राहुः दूर्वा, नीम व सदा सुहाग।
- केतुः कुशा, पंज बेल व गेंदा।
नक्षत्रों के पेड़-पौधे...
- कृतिकाः वहेश।
- रोहिणीः बांस।
- मृगशिराः जामुन।
- आर्द्रा: खैर।
- पुनर्वसुः शमी।
- पुष्यः चंदन।
- स्लेषाः वाकर।
- मघाः नागकेशर।
- पूर्वा फाल्गुनीः कस्टर।
- उत्तरा फाल्गुनीः महुआ।
- हस्तः कदम।
- चित्राः चंदन।
- स्वातीः कोहा।
- विशाखाः रीठा।
- अनुराधाः मौलश्री।
- ज्येष्ठाः उमर।
- मूलः किखर।
- पूर्वाषाढ़ः खमेर।
- उत्तराषाढ़ः पीपर।
- श्रवणः फ्लास।
- धनिष्ठाः नीम।
- शतभिषाः आम।
- पूर्वा भाद्रपदः हर्रा।
- उत्तरा भाद्रपदः शीशम।
- रेवतीः बरगद।
- अश्विनीः बेल।
- भरणीः आंवला।
- अभिजीतः सीताफल।