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नेपाल सीमा में पहुंचे 45 मजदूर व अभियंता, शुरू किए वाल्मीकि नगर बैराज की मरम्मत

Wed, 24 Jun 2020 03:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर।

सार

  • मंगलवार को भारत व नेपाल के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में मिली थी सशर्त अनुमति
  • मरम्मत कार्य शुरू होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों ने ली राहत की सांस

 
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Kushinagar news - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गंडक नदी के वाल्मीकि नगर बैराज व इससे जुड़े तटबंध तथा नहर प्रणाली की मरम्मत के लिए नेपाली प्रशासन की अनुमति के बाद बुधवार को मरम्मत में प्रयुक्त होने वाली सामग्री, वाहन तथा 45 मजदूरों के साथ अनुरक्षण कार्य कराने वाले अभियंता नेपाल सीमा में पहुंच गए। बांध के क्षतिग्रस्त बिंदुओं के अनुरक्षण का कार्य शुरू हो गया है। शर्त के मुताबिक मजदूरों के लिए विशेष पास व कोरोना मुक्त प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

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कोरोना संकट के दौरान बीते मई में नेपाली प्रशासन ने वाल्मीकि नगर बैराज व बांध के नेपाल वाले हिस्से में भारतीय अभियंताओं व मजदूरों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। 15 जून से बरसात होने के साथ ही गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। इसके बाद बैराज व बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का मामला गरमा गया।

अमर उजाला ने इस समस्या को लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद मंगलवार को भारत व नेपाल के अफसरों के बीच हुई वार्ता में सशर्त सहमति बनी। तय हुआ कि बिहार के सिंचाई विभाग के वाल्मीकि बैराज के कार्यपालक अभियंता जमील अहमद के नेतृत्व में ऐसे लोग जो नेपाली क्षेत्र में जाकर पुल व तटबंधों की मरम्मत कार्य करेंगे, उनको विशेष पास जारी किया जाएगा।
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नेपाली प्रशासन की शर्त के मुताबिक सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर कोरोना मुक्त होने का प्रमाण पत्र दिया गया। सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत बुधवार को ट्रैक्टर ट्राली पर मरम्मत हेतु आवश्यक सामाग्री लोड कर नेपाल सीमा में मजदूर तथा कुशल कारीगर व अभियंता प्रवेश किए और अनुरक्षण कार्य शुरू किया गया।

 

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पहली बार इतनी चर्चा में है बैराज

कार्यपालक अभियंता जमील अहमद ने बताया कि नेपाली हिस्से में प्रवेश कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। जल्दी ही सभी जरूरी बिंदुओं पर मरम्मत व अनुरक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

भारत व नेपाल के बीच सदियों पुराने प्रगाढ रिश्ते का सशक्त हस्ताक्षर वाल्मीकि गंडक बैराज पहले कभी भी इतनी चर्चा में नहीं रहा। गौर करने वाली बात यह है कि इस बैराज की वजह से यूपी व बिहार के लाखों लोगों के खेतों में नहरों से पानी पहुंचता है।

स्वयं नेपाल के किसान भी इससे लाभ पाते हैं। इसके अलावा नेपाल को सूरजपुरा पावर हाउस से बिजली भी मिलता है। यहां के तटबंध, पुल व नहर प्रणाली के रखरखाव पर भारत सरकार धन खर्च करती है।
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