‘निगाहों में मंजिल थी, गिरे और गिरकर संभलते रहे। हवाओं ने बहुत कोशिश की, मगर चिराग आंधियों में जलते रहे’। किसी शायर की ये पंक्तियां गोरखपुर की होनहार दो पहलवान बेटियों पर खूब फिट बैठती हैं। इनके जीवन में जहां संघर्षों की दास्तान है, वहीं इसकी बदौलत हासिल की गईं उपलब्धियां आसमान की बुलंदियों को छूने की प्रेरणा देती हैं। अभावों के बीच बचपन से कामयाबी के बुलंदी तक की पुष्पा यादव की कहानी भावुक कर देती है। एक साल तक बेड पर रहने के बाद मैट पर वापसी करने वाली वैष्णवी सिंह की कहानी ‘पंखों से नहीं हौसलों से ‘उड़ान’ की कहावत को चरितार्थ करती है।
घुटने की चोट ने और मजबूत बनाया
एशियन गेम्स, स्कूल स्टेट प्रतियोगिताओं में लगातार स्वर्ण पदक हासिल करने से वैष्णवी सिंह का मनोबल बढ़ा। लगा कि ओलंपिक में देश को पदक दिलाने का सपना अब जरूर पूरा होगा। मगर एक मैच के दौरान घुटने में लगी चोट ने सभी सपनों को फर्श पर ला दिया। अब तक की सभी तैयारियां फ्लैश बैक के रूप में आंखों के सामने नजर आने लगी। कैसे पिता जी हाथ पकड़कर पहली बार अखाड़े में लेकर गए, लोगों के तानों की भी परवाह नहीं की।
हमेशा हौसला बढ़ाते रहे तो क्या एक चोट की वजह से मैं अपने साथ साथ पूरे परिवार के ख्वाबों को चकनाचूर कर देती। नहीं तब मैने ठाना की घुटने का आपरेशन कराऊंगी और वापस मैट पर लौटूंगी। वैष्णवी का कहना है कि खुशनसीब हूं कि ऐसा करने में कामयाब रही। पिछले ही महीने वाराणसी में आयोजित पूर्वांचल केसरी खिताब पर कब्जा जमाकर ये साबित किया की मुझमें अभी खेल बाकी है।
मूलरूप से बांसगांव के चतुर बंदुआरी की रहने वाली वैष्णवी को कुश्ती विरासत में पहलवानपिता रमाशंकर सिंह से मिली है। वे सीआरपीएफ में तैनात हैं। मां अर्चना देवी जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। कुश्ती के क्षेत्र में जाने के लिए उन्हें परिवार का साथ मिला। उनके दोनों भाई गौरव और राज सिंह भी पहलवान हैं। उनका सपना देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करने का है।
ये हैं उपलब्धियां
ओपन एशियन गेम में स्वर्ण पदक, गोंडा में आयोजित स्कूल स्टेट में स्वर्ण, मथुरा में आयोजित स्कूल स्टेट में स्वर्ण पदक, मेरठ में आयोजित 15 वर्षीय राज्य स्टेट कुश्ती में स्वर्ण, दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया गेम्स में तीसरा स्थान, बुलंदशहर में आयोजित स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, सोनीपत स्कूल नेशनल में रजत, बनारस में आयोजित सब जूनियर स्टेट स्वर्ण पदक, पूर्वांचल केसरी, उत्तर प्रदेश महिला केसरी।