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International Women's Day: गोरखपुर की 'दंगल गर्ल' के आगे लड़के भी मान लेते हैं हार

Sun, 08 Mar 2020 06:58 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।

सार

  • 'हवाओं ने बहुत कोशिश की, मगर चिराग आंधियों में जलते रहे'
  • कुश्ती के क्षेत्र में अपनी चमक बिखेर रही वैष्णवी सिंह और पुष्पा यादव
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महिला दिवस 2020: वैष्णवी सिंह और पुष्पा यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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‘निगाहों में मंजिल थी, गिरे और गिरकर संभलते रहे। हवाओं ने बहुत कोशिश की, मगर चिराग आंधियों में जलते रहे’। किसी शायर की ये पंक्तियां गोरखपुर की होनहार दो पहलवान बेटियों पर खूब फिट बैठती हैं। इनके जीवन में जहां संघर्षों की दास्तान है, वहीं इसकी बदौलत हासिल की गईं उपलब्धियां आसमान की बुलंदियों को छूने की प्रेरणा देती हैं। अभावों के बीच बचपन से कामयाबी के बुलंदी तक की पुष्पा यादव की कहानी भावुक कर देती है। एक साल तक बेड पर रहने के बाद मैट पर वापसी करने वाली वैष्णवी सिंह की कहानी ‘पंखों से नहीं हौसलों से ‘उड़ान’ की कहावत को चरितार्थ करती है।

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घुटने की चोट ने और मजबूत बनाया
एशियन गेम्स, स्कूल स्टेट प्रतियोगिताओं में लगातार स्वर्ण पदक हासिल करने से वैष्णवी सिंह का मनोबल बढ़ा। लगा कि ओलंपिक में देश को पदक दिलाने का सपना अब जरूर पूरा होगा। मगर एक मैच के दौरान घुटने में लगी चोट ने सभी सपनों को फर्श पर ला दिया। अब तक की सभी तैयारियां फ्लैश बैक के रूप में आंखों के सामने नजर आने लगी। कैसे पिता जी हाथ पकड़कर पहली बार अखाड़े में लेकर गए, लोगों के तानों की भी परवाह नहीं की।

हमेशा हौसला बढ़ाते रहे तो क्या एक चोट की वजह से मैं अपने साथ साथ पूरे परिवार के  ख्वाबों  को चकनाचूर कर देती। नहीं तब मैने ठाना की घुटने का आपरेशन कराऊंगी और वापस मैट पर लौटूंगी। वैष्णवी का कहना है कि खुशनसीब हूं कि ऐसा करने में कामयाब रही। पिछले ही महीने वाराणसी में आयोजित पूर्वांचल केसरी खिताब पर कब्जा जमाकर ये साबित किया की मुझमें अभी खेल बाकी है।
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मूलरूप से बांसगांव के चतुर बंदुआरी की रहने वाली वैष्णवी को कुश्ती विरासत में पहलवानपिता रमाशंकर सिंह से मिली है। वे सीआरपीएफ में तैनात हैं। मां अर्चना देवी जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। कुश्ती के क्षेत्र में जाने के लिए उन्हें परिवार का साथ मिला। उनके दोनों भाई गौरव और राज सिंह भी पहलवान हैं। उनका सपना देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करने का है।

ये हैं उपलब्धियां
ओपन एशियन गेम में स्वर्ण पदक, गोंडा में आयोजित स्कूल स्टेट में स्वर्ण, मथुरा में आयोजित स्कूल स्टेट में स्वर्ण पदक, मेरठ में आयोजित 15 वर्षीय राज्य स्टेट कुश्ती में स्वर्ण, दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया गेम्स में तीसरा स्थान, बुलंदशहर में आयोजित स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, सोनीपत स्कूल नेशनल में रजत, बनारस में आयोजित सब जूनियर स्टेट स्वर्ण पदक, पूर्वांचल केसरी, उत्तर प्रदेश महिला केसरी।

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खोराबार के माड़ापार की रहने वाली पुष्पा यादव ने मुफलिसी में कामयाबी की इबारत लिखी है। छोटी सी उम्र में सिर से पिता विश्वनाथ का साया उठ गया। बड़े भाई ने चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण किया। बहन ने कुश्ती के क्षेत्र में नाम बनाना चाहा तो सहर्ष उसकी अनुमति प्रदान दी।

10 साल की उम्र में गांव में आयोजित कुश्ती की प्रतियोगिता में दम दिखाया तो पिता ने हौसला बढ़ाया। बस फिर क्या था पुष्पा ने इसे ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। पुष्पा ने बताया कि रीजनल स्टेडियम और सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में प्रैक्टिस करती हैं। उनका भी सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक हासिल करना है।

ये है उपलब्धि
- 2019 राज्य स्तरीय सब जूनियर कुश्ती में स्वर्ण पदक
- जूनियर वर्ग के राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक
- वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप बुलगारिया में खेलने गई
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