गोरखपुर विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर महिला शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। प्रो. दिव्या रानी सिंह अधिष्ठाता छात्र कल्याण हैं। प्रो. अनुभूति दुबे ललित कला एवं संगीत विभाग की अध्यक्ष हैं। वहीं, प्रो. सुनीता मुर्मू अंग्रेजी और प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी प्राचीन इतिहास विभाग के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। प्रो. शुभी धुसिया भी विभागाध्यक्ष की भूमिका में हैं।
नवाचार और विद्यार्थियों के विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी महिला शिक्षकों की भागीदारी अहम है। प्रो. विनीता पाठक तरंग की निदेशक हैं, जबकि प्रो. अलका सिंह संस्थान नवाचार परिषद (आईआईसी) की अध्यक्ष हैं। भूगोल विभाग की अध्यक्ष डॉ. स्वर्णिमा सिंह भी विभागीय जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।
विद्यार्थियों की शिकायतों से प्लेसमेंट तक देख रहीं काम
विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान और करिअर निर्माण में भी महिला शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। डॉ. प्रीति गुप्ता विद्यार्थियों की शिकायतों के निवारण के लिए शुरू की गई सिंगल विंडो की नोडल अधिकारी हैं। वहीं, डॉ. तेजस्वी दुबे प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी के रूप में विद्यार्थियों को रोजगार और प्रशिक्षण से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा रही हैं।
विश्वविद्यालय से संबद्ध डीएवी पीजी कॉलेज में डॉ. शैल पांडेय प्राचार्य हैं। इस तरह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े शैक्षणिक संस्थानों में महिला शिक्षक प्रशासनिक नेतृत्व से लेकर विद्यार्थियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्राओं की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय में 7,040 छात्राएं थीं। अब यह संख्या बढ़कर 10,530 हो गई है। यानी पांच वर्षों में छात्राओं की संख्या में 3,490 का इजाफा हुआ है।
छात्राओं की संख्या में यह बढ़ोतरी उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। विश्वविद्यालय में महिला शिक्षकों की नेतृत्वकारी भूमिका और छात्राओं की बढ़ती संख्या शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की मजबूत होती उपस्थिति को रेखांकित करती है।