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Gorakhpur News: रचनात्मक सोच और हौसलों की उड़ान, सफलता से महिलाएं बना रहीं पहचान

Thu, 09 Jul 2026 02:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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गोरखपुर। कभी शौक के तौर पर शुरू हुई पेंटिंग, क्राफ्ट और हस्तशिल्प की कला आज गोरखपुर की अनेक महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन चुकी है। अपनी रचनात्मक सोच, मेहनत और हुनर के बल पर वे न केवल सुंदर और आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं बल्कि उन्हें बाजार तक पहुंचाकर आर्थिक रूप से भी सशक्त बन रही हैं।
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स्थानीय प्रदर्शनियों, मेलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये इन महिलाओं को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का बेहतर अवसर मिल रहा है। इससे आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी पहचान भी बन रही है। उनकी यह यात्रा कई महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बन गई है।

मधुबनी के रंगों से सपनों को दे रहीं नई उड़ान

शुभांगी अग्रवाल अपनी रचनात्मकता और मेहनत के दम पर मधुबनी कला को नई पहचान दिला रही हैं। पारंपरिक मधुबनी डिजाइनों को आधुनिक अंदाज में कैनवास, होम डेकोर, उपहार सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर उकेर कर वह लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। शुभांगी बताती हैं, शुरुआत उन्होंने शौक के तौर पर की थी लेकिन लोगों की सराहना और मांग ने इसे व्यवसाय का रूप दे दिया। आज उनके हाथों से तैयार हर कलाकृति भारतीय लोक कला की सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
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मां के नुस्खों से शुरू हुआ सफर, अब होममेड ब्यूटी प्रोडक्ट्स से बनी पहचान
प्रिया शुक्ला ने मां के पारंपरिक घरेलू नुस्खों से प्रेरणा लेकर प्राकृतिक सौंदर्य उत्पाद बनाने की शुरुआत की। शुरुआती प्रयोग सफल रहे तो उन्होंने होममेड साबुन और लिप बाम तैयार करने का काम शुरू कर दिया। आज उनके हर्बल और केमिकल फ्री उत्पाद ग्राहकों के बीच पसंद किए जा रहे हैं। प्रिया का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी मेहनत और विश्वास के दम पर सफल व्यवसाय बन सकता है।

टेराकोटा की मूर्तियों से बनाई पहचान
स्वपाली मिश्रा ने टेराकोटा कला को अपनी पहचान बना लिया है। मिट्टी से भगवान की मूर्तियां, सजावटी कलाकृतियां और हस्तनिर्मित शोपीस तैयार कर उन्होंने अलग पहचान बनाई है। उनकी बारीक कारीगरी और पारंपरिक कला के आधुनिक स्वरूप को लोगों ने खूब सराहा है। प्रदर्शनियों और विभिन्न आयोजनों में उनकी कलाकृतियों को प्रशंसा मिली है, जिससे उन्हें व्यापक पहचान भी मिली। स्वपाली का कहना है कि टेराकोटा केवल कला नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने का माध्यम है।
घरेलू मसालों की खुशबू से मिली कामयाबी
काजल गुप्ता ने घर के पारंपरिक मसालों को अपने उद्यम का आधार बनाया। शुद्ध और घर में तैयार किए गए हल्दी, धनिया, मिर्च, गरम मसाला सहित विभिन्न मसालों की पैकिंग और बिक्री कर उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। उनके मसाले गुणवत्ता, शुद्धता और पारंपरिक स्वाद के कारण ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं। काजल का कहना है कि स्वाद के साथ भरोसा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। आज उनका छोटा सा प्रयास सफल उद्यम में बदल चुका है। वह अन्य महिलाओं को भी अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
देखते ही हर किसी को पसंद आ जाती हैं अमृता की पेंटिंग्स
अमृता सिंह ने पेंटिंग और रंगोली की कला को अपनी पहचान बना ली है। आकर्षक रंग संयोजन और सृजनात्मक डिजाइनों के जरिये वह पारंपरिक और आधुनिक कला का सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं। उनकी पेंटिंग्स और रंगोलियां विभिन्न प्रदर्शनियों और आयोजनों में सराही जा चुकी हैं। अमृता का कहना है कि कला केवल शौक नहीं बल्कि भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक महिलाएं अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसे आत्मनिर्भरता व सफलता का आधार बनाएं।
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