एक तरफ आर्थिक संकट तो दूसरी तरफ लॉकडाउन की वजह से बीमार बेटे के हैदराबाद में फंसने और पति का
बेंगलुरु से न आ पाने का गम एक मां के लिए परेशानी का सबब बन गया है। मां गांव पर अपने आंसुओं को छिपाए घर में अपना काम किसी तरह कर रही है। वह कभी प्रधान से तो कभी गांव के संभ्रांत लोगों से बेटे को लाने का गुहार लगा रही हैं।
खोराबार के रामपुर डांड़ी गांव निवासी सुनीता ने बताया कि उनके पति रामसजन
बेंगलुरु में रहकर मजदूरी करते हैं और बेटा राहुल साहनी 18 वर्ष, हैदराबाद के बोराबंदा स्थित राजीव नगर में मजदूरी करता है। बेटे के साथ गोरखपुर का ही एक युवक भी रहता है।
लॉकडाउन की वजह से काम बंद हो गया। पति और बेटा वहीं फंस गए। प्रथम चरण के लॉकडाउन में बेटे राहुल को बुखार हो गया। साथ रह रहे युवक ने किसी तरह उसे दवा लाकर दी, लेकिन अस्पताल नहीं पहुंचा सका। इसकी जानकारी उन्हें हुई तो वह प्रधान से गुहार लगाईं।
प्रधान फागू निषाद ने किसी तरह वहां एक शख्स के खाते में रकम भेजकर उसे अस्पताल में भर्ती कराया। दवा से राहुल का बुखार ठीक हो गया। मां ने बताया कि अब वह मानसिक रूप से कमजोर हो गया है।
किसी तरह साथ रहने वाला युवक देखभाल कर रहा है लेकिन वह भी परेशान हो गया है। उसके पास भी रुपये नहीं हैं। उधर बेटा अजीब-अजीब हरकतें कर रहा है। सुनीता ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थित ऐसी नहीं है कि वह वहां जा सकें या रुपये भेजकर किसी तरह गांव बुला सकें।