गोरखपुर ग्रामीण वितरण खंड प्रथम के अवर अभियंता प्रमोद कुमार पाल की मौत के बाद अगले दो से तीन दिनों के भीतर ही एक अनजान महिला ने खुद को मृतक अभियंता की पत्नी बताकर निगम में दावा किया। अधिशासी अभियंता ने बताया कि उक्त महिला के मुताबिक उसकी और प्रमोद की कोर्ट मैरिज हुई थी। इस लिहाज से अभियंता की पत्नी का दर्जा देते हुए उत्तराधिकारी उसे ही माना जाए। इससे पहले अवर अभियंता की मौत के दूसरे दिन ही प्रमोद की पत्नी मंजू देवी को अनुग्रह धनराशि सौंप दी थी। हालांकि, तबतक इस महिला की तरफ से किसी प्रकार का कोई दावा नहीं किया गया था।
अधिशासी अभियंता हवलदार रावत ने बताया कि अवर अभियंता की मौत के दो से तीन बाद ही एक अंजान महिला ने खुद को मृतक अवर अभियंता की पत्नी बताकर पेंशन और नौकरी का हकदार बताया था। निगम के पास दावे का पत्र आने के बाद इसकी जांच कराई गई।
प्रमोद पाल ने अपने सर्विस बुक, जीपीएफ खाते में नॉमिनी पत्नी मंजू देवी को बनाया था। इसके अलावा निगम की तरफ से सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज नामिनी उनकी पत्नी मंजू देवी को अवकाश नकदीकरण व अनुग्रह धनराशि के रूप में 7.27 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा खंड के अधिशासी अभियंता ने 24 मई को लगभग 20 लाख रुपये आरटीजीएस कर मंजू के खाते में भेज दिया था।
इधर, निगम की तरफ से दावा करने वाली महिला को पत्र भेजकर प्रमाण पत्र पेश करने को कहा गया था। उसने दावा किया था कि कोर्ट में उसकी शादी हुई थी। उस लिहाज से महिला को मैरिज रजिस्ट्रार के दफ्तर से प्रमाण पत्र के अलावा शादी की फोटो या अन्य प्रमाण पत्र देने को कहा। लेकिन, महिला ने एक महीना बीतने के बाद भी कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया है।
अधिशासी अभियंता ने बताया कि फिलहाल तो साफ है कि मंजू देवी ही मृतक अभियंता की पत्नी है। उन्होंने सभी जगह परिवार और पत्नी के तौर पर नामिनी में पत्नी मंजू देवी को अधिकार दिया था। बताया कि चूंकि, महिला ने पत्नी होने का दावा किया है, ऐसे में उससे भी कागजी प्रमाण मांगे गए हैं। एक अंतिम बार उस महिला को पत्र भेजकर प्रमाणपत्र पेश करने को कहा जाएगा। इसके बाद भी अगर वह सामने नहीं आई तो विधिसम्मत पत्नी मंजू देवी को सारे अधिकार दे दिए जाएंगे।