गोंडा रेल हादसा : कुछ ही घंटे के भीतर रेलवे ट्रैक को खाली कराने में मिली सफलता
रात में ही ब्लॉक लेकर पटरी बिछाने से तार जोड़ने तक का किया काम
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ के बेपटरी होने से क्षतिग्रस्त रेल खंड को पूर्वोत्तर रेलवे ने रिकार्ड 30 घंटे के भीतर ही दुरुस्त कर ट्रेनों का संचालन भी शुरू करा दिया। ऐसा संभव हुआ हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू और रेस्टोरेशन की प्लानिंग साथ-साथ करने से। इसका नतीजा यह रहा कि जहां हादसे के छह घंटे के भीतर घटनास्थल से भीड़ हटाने में कामयाबी मिली वहीं, रात में ही निर्माण सामग्री पहुंचने की वजह से पुनर्निर्माण का कार्य भी तत्काल शुरू करना संभव हो पाया।
आमतौर पर बड़े रेल हादसों के बाद घटनास्थल से भीड़ हटाने और क्षतिग्रस्त हिस्से का निर्माण करने में काफी वक्त लग जाता है। यही वजह है कि जब गोंडा के पास रेल हादसा हुआ तो तमाम यात्रियों ने ट्रेन छोड़कर पैदल ही घर की राह पकड़ ली। जो लोग गोरखपुर या बस्ती जैसे स्टेशनों पर थे वे ट्रेन के बजाय दूसरे विकल्प पर विचार कर रहे थे।
उधर, रेलवे के अफसरों ने हादसे की सूचना के 25 मिनट के अंदर मौके पर दुर्घटना राहत यान व मेडिकल टीम भेजने के साथ ही रास्ते में रोकी गई ट्रेनों को किस रास्ते गंतव्य तक भेजा जाए, इस पर काम शुरू कर दिया। यह हादसा गोंडा और मनकापुर के बीच था, इसलिए केवल इसी बीच के 22 किलोमीटर हिस्से को ब्लॉक किया गया।
गोरखपुर से चलने वाली वैशाली-गोरखधाम समेत सभी ट्रेनों को बढ़नी वाया गोंडा या मनकापुर वाया अयोध्या के रास्ते चला दिया गया। बदले मार्ग से ही सही, ट्रेनों का संचालन शुरू होने पर दूसरे स्टेशनों की दिक्कत खत्म हो गई।
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बस से भेजी राहत सामग्री
हादसे के तत्काल बाद क्षतिग्रस्त ट्रेन के पैंट्रीकार में बची पानी की बोतल व खाने-पीने के अन्य सामान प्रभावित रेल यात्रियों में निशुल्क बंटवा दिया गया। वहीं स्थानीय प्रशासन की मदद से गोंडा से भी 10 बसों से पानी की बोतल, बिस्किट और नमकीन के पैकेट घटनास्थल पर भेजे गए। वहां से क्षतिग्रस्त ट्रेन के यात्रियों को मनकापुर रेलवे स्टेशन लाया गया। इससे घटनास्थल पर मौजूद भीड़ को कम करने में मदद मिली।
रात में ही मौके पर भेजी गई निर्माण सामग्री
सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे में हर वक्त पटरी, स्लीपर, गिट्टी आदि जरूरी निर्माण सामग्री से भरी एक ट्रेन तैयार खड़ी रहती है। घटनास्थल पर जैसे भी भीड़ कम हुई तो वहीं अप लाइन को रात में 11:58 बजे डीजल इंजन से चलाने लायक बनाकर राहत सामग्री वाली मालगाड़ी उस ट्रैक पर लाई गई, जिससे मौके पर पर्याप्त मात्रा में सामग्री पहुंच गई। इसके बाद अलग-अलग खंड से 800 मजदूर व अन्य कर्मचारियों की टीम लगाकर क्षतिग्रस्त पटरी को हटाने से लेकर पटरी बिछाने और ओएचई लाइन जोड़ने तक का काम एक साथ चलाकर महज 30 घंटे में ही दोनों ट्रैक को ट्रेन चलाने लायक बना लिया गया। बृहस्पतिवार को दोपहर बाद हादसा हुआ और शुक्रवार रात तक दोनों ट्रैक पर नियमित रूप से ट्रेनों का संचालन भी शुरू करा दिया गया।