हत्या के बाद सभी ने शव के साथ एक फोटो भी खींची थी, जिसमें अमरजीत के हाथ में चाकू था और शव नीचे पड़ा था तथा गर्दन रेता हुआ था। साथ ही अमरजीत का मित्र गर्दन पर चढ़ा था। वहीं हत्या के बाद मृतक के मोबाइल फोन से भोर में हत्यारोपी ने पत्नी अनीता से बात भी की थी।
हत्यारोपी अमरजीत चार फरवरी की सुबह भी जहां शव मिला था, वहां और पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद था। बाद में जब उसे लगा कि वह पकड़ा जाएगा, तब वह हरिद्वार भाग गया। पुलिस ने जब मृतक व उसकी पत्नी के मोबाइल फोन का सीडीआर निकलवाया, तब पूरा मामला खुल गया। एसपी ने बताया कि पुलिस ने पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने हत्या का राज उगल दिया।
चार फरवरी को हत्या कर फेंकी गई लाश मिलने के बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की थी। पुलिस को पत्नी पर उस समय पहली बार शक हुआ जब उसने चार फरवरी की सुबह ही अपने एक रिश्तेदार से कहा कि वहां गिरजेश का शव पड़ा है। शव लाकर दाह संस्कार कर दो और पुलिस को सूचना मत दो। उस व्यक्ति ने शव मिलने के बाद यह बात थाने के एक दरोगा को बता दिया। तभी से पहली बार पुलिस को पत्नी पर शक हुआ।
इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो सीआआर से साफ हो गया कि मौत से कुछ देर पहले तक मृतक गिरिजेश के मोबाइल फोन का इस्तेमाल हुआ है, जबकि पत्नी ने तीन फरवरी की शाम ही बंद होने की जानकारी दी थी। मोबाइल लोकेशन और सीडीआर से पुलिस साक्ष्य जुटाने के बाद पत्नी को हिरासत में ली और पूरी घटना खुलकर सामने आ गई।
पुलिस के अनुसार, एक तरफ उसका पति गायब था और दूसरी तरफ तीन फरवरी की रात में ही उसने मीट बनाया था, लेकिन उसे किसी ने भी नहीं खाया था। पूछने पर उसने बताया कि पति के साथ खाना था। फिर पुलिस ने बताया कि वह तो दावत में गया तो फिर कैसे खाता? इसके बाद वह बयान बदलने लगी।
कई बार बयान बदलने की वजह से संदेह होने की वजह से पुलिस पत्नी की गतिविधियों की जांच करने लगी। एक बार पत्नी ने बताया कि पति ने मुर्गा खरीदकर लिया है, दूसरी बार बोली बड़हलगंज से लाई और फिर बोली कि बाग के पास से खुद खरीदा है।