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Lockdown 3.0: लॉकडाउन में फंसे रह गए तीन बेटे, पत्नी ने दी पति को मुखाग्नि

Sun, 10 May 2020 05:36 PM IST
vivek shukla अमित श्रीवास्तव महराजगंज(बस्ती)।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में फंसे तीन बेटे पिता की मौत होने पर घर नहीं आ पाए। ग्रामीणों के समझाने पर पत्नी ने पति को मुखाग्नि दिया। घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही हैं। वहीं पिता की मौत में शामिल न हो पाए बेटे सदमे में है। वीडियो कॉलिंग के जरिए पिता का अंतिम दर्शन किए।

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हर्रेया थाना क्षेत्र के कोदई गांव निवासी संतराम शर्मा घर पर ही रहकर खेती बारी करते थे। उनके तीन बेटो में राधे कृष्ण पूना, अर्जुन प्रसाद हरियाणा और सबसे छोटा बेटा सुभाष पंजाब में अपने परिवार के साथ रहकर वहीं नौकरी करते हैं।

संतराम के साथ पत्नी कैलासी पैतृक गांव में रहते थे, रविवार को दोपहर में 12 बजे अचानक संतराम की तबियत बिगड़ गई। पड़ोसी उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन कुछ ही देर में संतराम शर्मा (70  वर्ष) की मौत हो गई।

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बेटों को नहीं हो रहा था विश्वास

गांव के लोग संतराम की मौत की सूचना उनके तीनों बेटो को दिया लेकिन बेटे अचानक पिता की मौत को सही नहीं मान रहे थे। गांव के लोग जब वीडियो कॉलिंग के जरिए तो उन्हें पिता का शव दिखाया तो उनके होश उड़ गए।

बेटों ने पिता का अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए स्थानीय प्रशासन से आने के लिये प्रशासन ने वहां से आने की अनुमति नहीं दिया। लगभग तीन घंटे के प्रयास के बाद संतराम शर्मा के बेटों ने लॉकडाउन के चलते पिता के अंतिम संस्कार में न पहुंच पाने की मजबूरी ग्रामीणों से बताई।

इस पर गांव के पूर्व जिला पंचायत सदस्य समीर कुमार चौधरी, अमरकांत उपाध्याय, धुरपचन्द्र उपाध्याय सहित अन्य ग्रामीणों की सहमति से पत्नी कैलासी देवी ने खुद ही अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। शाम चार बजे क्षेत्र के पेंदाघाट पर दिवंगत संतराम को उनकी पत्नी कैलासी ने मुखाग्नि दिया।

 
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