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Gorakhpur News: फैक्टरी छोटी हो या बड़ी, प्रदूषण विभाग का ये प्रमाण पत्र जरूरी, नहीं तो देना पड़ेगा जवाब

Mon, 06 May 2024 12:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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रविवार को सुबह रहा धूधं दाउदपुर की फोटो सुबह 7:30 बजें की फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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आमी नदी के पानी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सीईटीपी तो लगेगी ही, सभी फैक्टरियों को भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी जरूरी है। गीडा क्षेत्र में लगी करीब 250 फैक्टरियां भी इस नियम के दायरे में हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि फैक्टरी चाहे छोटी हो या बड़ी, उन्हें एनओसी लेना जरूरी है।
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उनके आवेदन पर फैक्टरी की जांच कर ही यह पता लगाया जा सकता है कि कंपनी से धुआं और प्रदूषित पानी का उत्सर्जन होता है या नहीं। आमी नदी के पानी में फैक्टरियों का जहरीला पानी जाने से इसमें घुलित ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो गई है।

इससे नदी का जलीय पर्यावरण बिगड़ रहा है। उद्योगों से निकले प्रदूषित पानी को आमी नदी में सीधे गिरने से रोकने के लिए अड़िलापार में चार एमएलडी का सीईटीपी लगाने का प्रस्ताव है। इससे संबंधित सर्वे के दौरान यह जानकारी मिली कि गीडा क्षेत्र में पिछले पांच साल में तमाम ऐसी नई फैक्टरियों लगी हैं, जिनकी प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी ही नहीं ली गई है।
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इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से ऐसी 300 फैक्टरियों को नोटिस जारी कर एनओसी लेने का निर्देश दिया गया। इसके बाद फैक्टरी मालिकों की तरफ से चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के बीच समन्वय बैठक हुई, जिसमें इससे संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।

इस दौरान उद्यमियों ने यह तर्क रखा कि गीडा क्षेत्र में लगी 35 फैक्टरियां ह्वाइट श्रेणी की हैं, जिन्हें एनओसी के लिए आवेदन ही नहीं करना है। वहीं रेड श्रेणी में जो 12 उद्योग हैं, उन्होंने एनओसी ले रखी है।
 
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प्रदूषण सूचकांक से तय होती है श्रेणी

किसी भी औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषण सूचकांक या पीआई 0 और 100 के बीच की एक संख्या है। बढ़ता पीआई मान उस क्षेत्र से उच्च प्रदूषण भार को दर्शाता है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रदूषण सूचकांक के आधार पर उनका वर्गीकरण किया जाता है।

ये है वर्गीकरण की श्रेणी
श्वेत श्रेणी : इस श्रेणी के उद्योगों को निम्न या गैर-प्रदूषणकारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। श्वेत श्रेणी के उद्योगों का प्रदूषण सूचकांक 0 से 20 के बीच होता है।
हरित श्रेणी : इस श्रेणी के उद्योग का प्रदूषण सूचकांक 21 से 40 के बीच होता है। ये प्रदूषणकारी उद्योग माने जाते हैं, लेकिन मध्यम स्तर पर जो स्वस्थ मानव के लिए हानिकारक नहीं होते हैं।

ऑरेंज श्रेणी : इस श्रेणी में वे उद्योग शामिल हैं, जिनका प्रदूषण सूचकांक 41 से 59 के प्रदूषण स्कोर के बीच है। इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले उद्योग पर्यावरण में उच्च स्तर के प्रदूषक उत्सर्जित करते हैं।
लाल श्रेणी : इस श्रेणी के उद्योग जहरीले और खतरनाक कचरे का उत्सर्जन करते हैं। इनका प्रदूषण सूचकांक स्कोर 60 से अधिक होता है।


चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से भेजे गए नोटिस पर चर्चा के लिए उद्यमियों और अफसरों के बीच बैठक हुई। हमने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। गीडा क्षेत्र में तमाम ऐसे उद्योग हैं जो श्वेत श्रेणी में हैं, जिनके एनओसी के लिए आवेदन नहीं करना है। उन्हें 2019 की स्थिति से भी अवगत कराया गया।

हम लोगों ने उन्हें बताया कि केवल उन्हीं से एनओसी के लिए आवेदन कराएं, जिनके लिए ऐसा प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य हो। इससे अन्य उद्यमियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि उद्यमियों के साथ बैठक में स्पष्ट कर दिया गया था कि एनओसी के लिए सभी को आवेदन करना होगा। आवेदन के आधार पर सत्यापन किया जाएगा, तभी तो पता लग सकेगा कि उस उद्यम से किस प्रकार का कचरा उत्सर्जन हो रहा है। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू है। उद्यमियों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। कई उद्यमी कार्यालय आकर आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी भी ले चुके हैं।
 
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