राजकीय सम्मान के साथ वायु सेना अधिकारी का अंतिम संस्कार किया गया
मेरा बेटा अखिलेश्वर हिम्मती था। उसने जीवन में संघर्ष करना सीखा था, वह कायर नहीं था। आज भी यकीन नहीं हो रहा है कि उसने खुदकुशी कर ली है। आज भी यही सवाल मुझे खुद अंदर से कुरेद रहा है कि बेटे ने आखिर खुदकुशी क्यों कर ली। कभी उसने घर पर भी कोई ऐसी बात नहीं बताई कि उसके साथ इतनी बड़ी कोई ठगी हो गई है, जिससे वह खुद के जीवन को ही खत्म करने का फैसला कर लिया। अभी चंद दिनों पहले की बात हैं, वह घर भी आया था। खेती में हाथ बंटाया और हंसी खुशी गया था।
यह बोल खुदकुशी करने वाले वायुसेना अधिकारी अखिलेश के पिता व रिटायर शिक्षक हरपुर निवासी चंद्रशेखर मिश्रा के हैं। यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। कांपते हाथों से कभी छह साल के मासूम पौत्र उत्कर्ष को संभालते। इतने में बेटे का शव एंबुलेंस से आया तो चारों तरफ फिर से चीख पुकार मच गई।
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शव को बाहर रखा गया तो गांव वालों की आंखें भी नम हो गईं। तभी उत्कर्ष पिता के शव के पास पहुंचा। पूछा, यह कौन है। शव पूरी तरह से कवर था, चेहरा हटाते ही पापा...पापा कहकर रोने लगा। फिर हीलाया, लेकिन मृत अखिलेश कैसे बोलते? इन सब से अंजान उत्कर्ष बार बार यही कहता रहा कि पापा क्यों नहीं उठ रहे रहें। क्यों सोए हैं।
मासूम उत्कर्ष की बातें सुनकर वहां पर मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। गांवों ने बताया कि उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा है कि अखिलेश्वर मिश्रा ने खुदकुशी कर लिया है। दोपहर में राजकीय सम्मान के साथ राप्ती तट पर उनका दाह संस्कार कर दिया गया। उनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा उज्जवल 11 साल का है और छोटा उत्कर्ष 6 वर्ष का है।