बारिश होने के बाद तहसील के चौकीदार रोजाना सुबह आठ बजे जार को निकालकर उसका मापन करके जिलाधिकारी कार्यालय के नाजिर को बारिश की सूचना देते हैं। लेकिन इससे सूचना का सही आंकलन नहीं हो पाता। वजह यह है कि यदि तहसील परिसर में लगे उपकरण क्षेत्र में बारिश नहीं हुई तो आंकलन कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद तहसीलकर्मी बीते साल हुई बारिश और अनुमान के आधार पर औसत निकालते हैं।
इसे भी पढ़ें: चिलुआताल हत्याकांड: मासूम की मां-मामा को हिरासत में लिया तो बोले- पिता है हत्यारा
इस समस्या को दूर करने के लिए जिलेभर में कुल 80 जगहों पर ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए जगह चिह्नित करके शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। सदर तहसील में लगे वर्षा मापी यंत्र से चौकीदार इमरान अहमद जानकारी लेकर रोजाना सूचना कलेक्ट्रेट के नाजिर को देते हैं।
जिला प्रशासन के लोगों का कहना है कि प्रत्येक ब्लाॅक में चार-चार जगहों पर ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए उन जगहों को चिह्नित किया गया है, जहां से बारिश का औसत अनुमान निकाला जा सके। 24 घंटे के भीतर होने वाली बारिश के बारे में सटीक जानकारी के लिए सभी 80 जगहों से आंकड़ा लिया जाएगा। इसके बाद इसका औसत निकाल लिया जाएगा।
इसे भी पढ़ें: सिद्धार्थनगर में नाबालिगों से दरिंदगी: जहां मासूमों के साथ हुई थी वारदात, वही था पुलिस का ठिकाना
जानकारों का कहना है कि ये वेदर स्टेशन डिजिटल होंगे। तापमान, आर्द्रता, विजिबिलिटी, विंड, बारिश व बर्फ मापन, सूर्य की तपन क्षमता, अल्ट्रा वॉयलेट रेज का प्रतिदिन का डाटा भी जुटाया जा सकेगा। स्टेशन की मदद से क्षेत्र में हल्की, तेज या भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि की आशंकाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। इसका सबसे अधिक लाभ खेती में मिलेगा।
आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने कहा कि बारिश समेत मौसम के संबंध में सटीक जानकारी के लिए ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए 80 जगहों को चुना गया है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। नए उपकरण पूरी तरह से डिजिटल होंगे। इनसे हर पल जानकारी मिलती रहेगी।