Vinod Upadhyay Gorakhpur: माफिया विनोद उपाध्याय की मौत के बाद अब सहयोगियों में कहीं खुशी-कहीं गम है। महीनों छकाने के बाद राजदारों ने ही विनोद को बलि चढ़वा दिया। अब एजेंसी नेटवर्क के सहारे जमीन और सूद के धंधे में मोटी रकम लगाने वालों की तलाश करेगी।
पांच महीने से एसटीएफ की टीम माफिया विनोद उपाध्याय के पीछे लगी थी। चूंकि, वह फोन, मेल, सोशल मीडिया से एकदम दूर रहता था। ऐसे में उसकी जानकारी नहीं मिल पाती थी। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि विनोद के कुछ राजदारों ने ही उसकी बलि चढ़वा दी।
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एसटीएफ टीम ने उन्हें अपने नेटवर्क से जोड़ लिया था। उन्हें विश्वास दिलाया कि विनोद के पकड़े जाने के बाद उन्हें राहत दिलाई जाएगी। इसी चक्कर में राजदार मुखबिर ने विनोद के सुल्तानपुर होकर छत्तीसगढ़ जाने की सूचना दे दी। एसटीएफ की टीम ने सुल्तानपुर के पास घेरकर रोकने की कोशिश की और जवाबी फायरिंग में विनोद का अंत हो गया।
माफिया विनोद उपाध्याय की मौत के बाद उसके सहयोगियों में कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। जानकार बताते हैं कि जांच एजेंसी की नजर अब हाल्सीगंज, घासीकटरा, सिंघड़िया, खोराबार (एक पेट्रोल पंप के बगल में) और दूसरी जगह की जमीनों के माफिया के साझेदारों पर है।
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ऐसे में इन साझेदारों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, माफिया के मारे जाने के बाद उसके कुछ साझेदार सुकून में भी हैं कि अब उन्हें माफिया को साझेदारी की रकम नहीं लौटानी होगी।
विनोद जमीन के धंधे से अपने खौफ का व्यापार करता था। यही कारण था कि उसके साझेदार और सहयोगी भी अलग-अलग वर्ग के थे। कुछ ब्लॉक प्रमुख से लेकर पूर्व एमएलसी तक उसके सहयोगी रहे हैं। विनोद अपने कुछ खास लोगों के नाम से उनके काले धन को जमीन के कारोबार में खपाता भी था।
सूत्र बताते हैं कि उसके मददगार भी ऐसे थे, जो आसानी से इसकी सेटिंग बनवा देते थे। इसमें पुराना गोरखनाथ का एक जमीन कारोबारी, गीता वाटिका, नंदानगर, घंटाघर, धर्मशाला के कुछ सहयोगी धन के साथ गाड़ी की व्यवस्था और दूसरे प्रदेशों में भी ठिकाना भी उपलब्ध करवा देते थे।
जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों शहर के पांच लोगों की पहचान हुई थी। इसमें एक के नाम पर विनोद ने करोड़ों रुपये की जमीन अवैध तरीके से साझेदार के नाम करवा दी थी। वह अपनी काली कमाई लगाकर इन साझेदारों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवा देता था। इसके बाद मनमाने तरीके से इन जमीनों को व्यापारियों को बेचता था।
फरारी के दौरान भी दो बार घंटाघर, घोष कंपनी और खोराबार की तरफ विनोद को देखा गया था। अपने इन्हीं साझेदारों के भरोसे वह शहर में भी स्कूटी और वैगनआर गाड़ी से घूम लिया करता था। दबाव बनते ही साझेदारों की सूचना और सेटिंग पर दूसरे प्रदेश चला जाता था।
आपको बता दें कि गोरखपुर व बस्ती मंडल में आतंक का पर्याय बने माफिया विनोद उपाध्याय को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। सुल्तानपुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के हनुमानगंज में बाईपास के पास शुक्रवार तड़के साढ़े तीन बजे एसटीएफ से बचने के लिए उसने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। विनोद प्रदेश के टॉप-61 माफिया की सूची में शामिल था, उसके पास से कारबाइन, पिस्टल, कारतूस व कार बरामद हुई है।