विनायक चतुर्थी मंगलवार को मनाई जाएगी। श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करेंगे। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार शाम चार बजकर 22 मिनट तक वृद्धि योग पश्चात ध्रुव योग है। इस योग में पूजन-अर्चन करने से श्रद्धालुओं को हर कार्य में सफलता मिलेगी।
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, हिंदू धर्म में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश का व्रत और पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्तों को सुख, समृद्धि और यश प्राप्ति होती है। वह सभी संकट से दूर करते हैं।
विनायक चतुर्थी पूजा विधि
पं. बृजेश पांडेय के अनुसार इस दिन स्नानादि के निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजन सामग्री पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें दूर्वा जरूर अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के उपरांत सभी देवी-देवताओं का स्मरण करें। पूजा के अंत में गणेशजी की आरती करें, फिर प्रसाद का वितरण करें। अगले दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण करें।