जंगल कौड़िया। जंगल कौड़िया से लेकर सोनौली तक फोरलेन के निर्माण में जद में आ रही दुकानों और मकानों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया एनएचआई अधिकारियों की ओर से शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को जंगल कौड़िया में अतिक्रमण हटाने पहुंचे एनएचआई के अधिकारियों और स्थानीय लोगों में नोकझोंक हुई। इस दौरान लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए पांच दिनों का समय और दिया गया। कहा गया कि इसके बाद अतिक्रमण हटाने में कोई सुनवाई नहीं की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, जंगल कौड़िया से सोनौली तक फोरलेन सड़क का निर्माण हो रहा है। जंगल कौड़िया ब्लॉक के आसपास अनेक लोगों के दुकान और मकान के हिस्से सड़क निर्माण भूमि की जद में आ रहे हैं। कुछ लोगों ने एनएचआई के चिह्नांकन के अनुसार स्वयं अतिक्रमण हटा लिया है जबकि कुछ लोगों ने ही हटाया था। ऐसे में अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत बृहस्पतिवार को एनएचआई और कार्यदाई संस्था पीएनसी समेत प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया जाना था। अतिक्रमण हटाने पहुंचे अधिकारियों की ग्रामीणों से तीखी नोकझोंक हुई और अतिक्रमण हटाने पर सहमति नहीं बन सकी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया एनएचआई की ओर से चिह्नांकन गलत तरीके से किया गया है। ग्रामीण दयानंद, मनोज, दिलीप, सोनू जायसवाल, पशुपतिनाथ, प्रदीप कुमार आदि ने कहा राजस्व के नक्शे में सड़क कुछ और है जबकि एनएचआई के नक्शे में कुछ और है। मौके पर मौजूद एनएचआई के लेखपाल ओमप्रकाश और पीएनसी डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर गजेंद्र सिंह ने कहा कि चिह्नांकन राजस्व और एनएचआई के नक्शे को मिलाकर किया गया है। नक्शे के अनुसार, सड़क कही 46 मीटर तो कही 44 मीटर बनानी है। ग्रामीणों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए चार महीने का समय दिया जा चुका है। इसके बाद पुनः पांच दिनों का समय दिया जा रहा है। यदि वह अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो प्रशासन की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया जाएगा।
वर्जन
गोरखपुर-सोनौली मार्ग का चौड़ीकरण दो साल में पूरा करना है। मार्ग निर्माण के लिए केवल सड़क की भूमि ली जा रही है। ग्रामीणों को शीघ्र अतिक्रमण हटा लेना चाहिए, जिससे विकास कार्य तेजी से हो सके।
-गजेंद्र सिंह सिंह, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर, पीएनसी (कार्यदाई संस्था)
फोटो परिचय.1. एनएचआई और पीएनसी के अधिकारी ग्रामीणों को समझाते हुए।
2. अमर उजाला में बृहस्पतिवार ( 18 मई ) को छपी हुई खबर