खोराबार (गोरखपुर)। खोराबार क्षेत्र के रानीडीहा में गाड़ी खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद रविवार रात थाने तक पहुंचते-पहुंचते हंगामे में बदल गया। कार सवार डॉक्टर और बाइक सवार डिलीवरी बॉय के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते-देखते मारपीट में बदल गई। इसके बाद दोनों पक्ष शिकायत लेकर थाने पहुंचे। आरोप है कि पुलिस ने थाने में मौजूद कई डिलीवरी बॉय को लाइट बंद कर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। कुछ डिलीवरी बॉय का शांतिभंग में चालान करते हुए बाइक भी सीज कर दी।
पिटाई का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल फोटो-वीडियो की पुष्टि नहीं करती है।
जानकारी के अनुसार, खोराबार क्षेत्र के रानीडीहा नहर के पास स्थित एक डिलीवरी कंपनी के ऑफिस के बाहर विवाद शुरू हुआ। यहां सैकड़ों डिलीवरी बॉय काम करते हैं। ऑफिस के बगल में एक दंत चिकित्सक का अस्पताल है। अस्पताल के सामने कार खड़ी थी। आरोप है कि कार के पीछे एक डिलीवरी बॉय ने बाइक खड़ी कर दी। इसे लेकर महिला डाॅक्टर, कर्मियों और डिलीवरी बॉय के बीच कहासुनी शुरू हो गई फिर मामला मारपीट तक पहुंच गया।
इसके बाद महिला डॉक्टर और उनके भाई डॉ. मनोज कुमार यादव तहरीर लेकर थाने पहुंचे। कुछ ही देर में 40-50 की संख्या में डिलीवरी बॉय भी थाने पहुंच गए। इस दौरान कुछ डिलीवरी बॉय पुलिसकर्मियों का वीडियो बनाने लगे। पुलिस की ओर से मना करने के बावजूद वीडियो बनाने और शोर-शराबा जारी रहने पर स्थिति बिगड़ गई।
एक पर नामजद और 25 अज्ञात डिलीवरी बॉय पर प्राथमिक दर्ज, छह का चालान
थाने पहुंचे डिलीवरी बॉय का आरोप है कि पुलिस ने लाइट बंद कर परिसर में उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर लाठियों से पीटा। इसमें अजीत कुमार, राज, बृजेश और संदीप समेत कई डिलीवरी बॉय घायल हो गए। उधर, पुलिस ने मामले में महिला डॉक्टर के भाई डॉ. मनोज कुमार यादव की तहरीर पर अरुण समेत 25 अज्ञात डिलीवरी बॉय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने इस मामले में अरुण, अमरनाथ, सूर्यजीत समेत छह डिलीवरी बॉय का शांतिभंग में चालान कर दिया है। तीन बाइक भी सीज की गई हैं। करीब 14 बाइक को लावारिस में दाखिल किया गया है।
इस संबंध में थाना प्रभारी सुधांशु सिंह ने कहा कि रात में दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। थाने पर बड़ी संख्या में डिलीवरी बॉय पहुंचकर हंगामा करने के साथ वीडियो बना रहे थे। उन्हें बार-बार समझाया गया कि जिनका विवाद है, वही अपनी बात रखें। थाने में पिटाई का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत है।