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जीप ड्राइवर से जरायम की दुनिया में बड़ा नाम बन गया था पन्ना यादव

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जीप ड्राइवर से जरायम की दुनिया में बड़ा नाम बन गया था पन्ना यादव
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गोरखपुर। बहराइच में शुक्रवार को एसटीएफ से मुठभेड़ में मारे गए शातिर बदमाश पन्ना यादव की कहानी फिल्मों जैसी है। गुलरिहा इलाके के मंगलपुर गांव के बौडिहवा टोला का मूल निवासी पन्ना वर्ष 1997-98 में यहां एक दरोगा की जीप चलाता था। इसी दौरान उसे दरोगा की बेटी से प्यार हो गया। दरोगा की बेटी का अपहरण कर उसे प्रयागराज ले गया।
दरोगा से जुड़ा मामला होने की वजह से पुलिस ने तेजी दिखाई और बेटी को बरामद कर लिया। तब पन्ना के खिलाफ एनसीआर दर्ज की गई थी। दरोगा ने बेटी की शादी दूसरी जगह कर दी, लेकिन पन्ना ने उससे मेलजोल बनाए रखा। बाद में आग से झुलस जाने की वजह से दरोगा की बेटी की मौत हो गई। यहीं से पन्ना का मिजाज बदल गया और वह पूरी तरह से जरायम की दुनिया में रम गया। पन्ना जुर्म की दुनिया में रमा तो बड़े अपराधियों ने उसे संरक्षण देना शुरू कर दिया। इलाके में एक बरात में मारपीट की सूचना पर पुलिस पहुंची। इस दौरान पन्ना सिपाही से भिड़ गया। इससे खार खाए पुलिसवालों ने उसे जमकर पीटा। इस घटना के बाद लोग उसे जानने लगे थे। वह इलाके में ‘डॉक्टर’ के उपनाम से कुख्यात हो गया। इसके बाद कई वारदातों में उसका नाम सामने आया।
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जेलर पर हमले के बाद सुर्खियों में आया
एक मामले में जेल से छूटने के बाद पन्ना लौटा तो फिर से वारदातों को अंजाम देने लगा। इस बीच उसने बदमाशों की फौज तैयार कर ली। उसने संतोष पांडेय, बबलू यादव, इंद्रपाल सिंह, नागेंद्र चौधरी, श्यामसुंदर, पिंटू और तेज प्रताप को साथ जोड़ लिया। पन्ना और उसके साथियों ने गोरखपुर और महराजगंज जिले में ताबड़तोड़ आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देकर सनसनी फैला दी। ताबड़तोड़ लूट की घटनाएं कर वह पुलिस को चुनौती देने लगा। उसने दर्जन भर से अधिक लूट की घटनाएं कीं। गोरखपुर के कैंट थाना इलाके में वर्ष 2014 में उसने जय साहनी की अपहरण के बाद हत्या कर दी। क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार किया था। उसके ऊपर कैंट पुलिस ने गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई भी की थी। इसी दौरान जेल में रहते हुए उसने जेलर हमला भी किया था। हालांकि इस मामले में जेलर ने पन्ना पर कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक, पन्ना यादव एक बार गोरखपुर जेल से फरार भी हो गया था।
बड़े भाई की मौत के बाद तोड़ लिया गांव से नाता
जानकारी के मुताबिक, पन्ना के बड़े भाई साधू जब जिंदा थे, तो वह अक्सर गांव आता था। वर्ष 2015 में बड़े भाई की मौत हो गई तो उसने गांव से नाता तोड़ लिया। इधर, पुलिस की सख्ती बढ़ गई तो वह बहराइच शिफ्ट हो गया। पन्ना ने यहां गांव में अपनी मकान बेच दी थी। अब गांव में उसकी 12 से 13 डिस्मिल भूमि बची है।
श्रीप्रकाश शुक्ल और श्रीपत जैसी धमक बनाना चाहता था
पन्ना यादव कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला और श्रीपत ढाढ़ी जैसी धमक बनाना चाहता था। तब इन दोनों बदमाशों की यूपी और बिहार में तूती बोलने लगी थी। श्रीप्रकाश शुक्ला और उसके साथी उत्तर प्रदेश और बिहार के माफिया ठेकेदारों के साथ मिलकर रेलवे का ठेका मैनेज करने लगे।
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पन्ना पर इन थानों में दर्ज थे केस
पन्ना के खिलाफ पहला केस गोरखपुर के गुलरिहा थाने में दुष्कर्म के आरोप में दर्ज हुआ था। फिर इसी थाने में चोरी, हत्या की कोशिश, महराजगंज के पनियरा में डकैती, आर्म्स एक्ट, गुलरिहा में गैंगेस्टर एक्ट, कैंपियरगंज में जमीन कब्जा, बाराबंकी के जैतपुर में हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट, बाराबंकी के मसौली थाने में डकैती, गैंगेस्टर, हत्या, लखनऊ के मडियांव थाने में आर्म्स एक्ट, गोरखपुर कैंट में छेड़खानी, हत्या, आपराधिक साजिश, कैंट में जालसाजी, गैंगेस्टर एक्ट, बहराइच के हरदी थाने में हत्या की कोशिश, 7सीएलए, आर्म्स एक्ट, बाराबंकी जीआरपी में आपराधिक साजिश, गोंडा के वजीरगंज थाने में जमीन कब्जा करने, तिवारीपुर में जमीन कब्जा करने, खीरी में गैंगेस्टर, डकैती, लूट के चार मुकदमे, गुलरिहा में गुंडा एक्ट, लखनऊ के गाजीपुर थाने में हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट, गोरखपुर के गुलरिहा में हत्या की कोशिश और आपराधिक साजिश के तहत केस है। पन्ना पर कुल 30 मुकदमे दर्ज थे।
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