गोरखपुर जिला पंचायत में सत्ता की चाबी निर्दलियों के हाथों में है। निर्दलीय जिधर जाएंगे, उधर जिला पंचायत की सरकार बनेगी। लिहाजा, निर्दलियों को अपने पाले में लाने की जोड़तोड़ शुरू हो गई है। हर राजनीतिक दल निर्दलियों को साधने में जुटा है।
गोरखपुर में जिला पंचायत की 68 सीटें हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जो नतीजा घोषित किया गया है, उसके मुुताबिक किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिला है।
बहुमत के लिए 35 जिला पंचायत सदस्यों का जीतना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब निर्दलियों को साधकर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पर काबिज होने की कवायद शुरू हो गई है।, क्योंकि चुनाव जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशी ज्यादा हैं। इसमें भाजपा और सपा के बागी भी शामिल हैं। अब राजनीतिक दल बागियों को अपना बता रहे हैं। साथ ही निर्दलियों को अपने पाले में लाने की जुगाड़ में लगे हैं।
भाजपा व सपा के नेता एक-एक विजयी निर्दलीय प्रत्याशी से बात कर रहे हैं। सबका प्रयास है कि निर्दलियों को साथ लाकर अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया जाए। बहरहाल, किस राजनीतिक दल को सफलता मिलेगी, यह तो जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के साथ साफ हो सकेगा। इतना तय है कि बिना निर्दलियों के जिला पंचायत की सरकार नहीं बनेगी। बागी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।