उत्तर प्रदेश में रविवार को पूर्ण लॉकडाउन के सरकार के फैसले के प्रति गोरखपुर के व्यापारियों ने एकजुटता दिखाई है। उनका मानना है कि सरकार जरूरत पड़े तो इसे दो दिन और बढ़ा सकती है। कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन बेहद अनिवार्य है। हालांकि, नाइट कर्फ्यू के समय को लोग कुछ गतिरोध भी है। व्यापारियों का मानना है कि दो घंटे आगे पीछे कर नाइट कर्फ्यू लगाने से अच्छा है कि पूरी तरह से लॉकडाउन ही लगा दिया जाए। शहर के सभी लोग वर्तमान में लॉकडाउन के पक्ष हैं। बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। शहर के कुछ व्यापारियों व व्यापारी नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं कुछ यूं दी।
संक्रमण फैलना सभी के लिए खतरनाक
एडी मॉल के निदेशक नीरज दास ने बताया कि कोरोना संक्रमण फैलना सभी के लिए खतरनाक है। लिहाजा लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। सरकार और प्रशासन कोई विकल्प निकालने में लगा है कि संक्रमण को फैलने से रोका जाए। इसी वजह से सरकार एक दिन का संपूर्ण लॉकडाउन लगा रही है। हालांकि मॉल के सिनेमाघरों की हालत पहले से ही खराब है। यहां तो अभी भी जनता कर्फ्यू प्रतीत होता है।
एक दिन और बढ़ा देना चाहिए लॉकडाउन
किराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष उमेश मद्धेशिया ने बताया कि सरकार को लॉकडाउन एक दिन के लिए और बढ़ा देना चाहिए। स्थिति सामान्य होने की दशा में ही व्यापारियों का कारोबार चल पाएगा। वर्तमान में शहर की दशा बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। सरकार के चाहिए शनिवार को भी लॉकडाउन लगा दे। इससे लोगों के मन में लॉकडाउन का डर बैठ जाएगा और लोग घरों में ही रहेंगे। तभी सुरक्षित रह सकते हैं। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें।
लॉकडाउन जरूरी लेकिन लोगों की जरूरतें भी पूरी हों
व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह मुन्ना ने बताया कि पिछली बार लॉकडाउन की वजह से बहुत से घरों में जरूरत के सामान का अभाव पड़ गया था। लॉकडाउन जरूरी है लेकिन प्रशासन को लोगों का भी ख्याल रखना पड़ेगा। लॉकडाउन के दौरान उनका उत्पीड़न न हो, उन्हें परेशानी न उठानी पड़े। लोगों में जरूरी सामान की आपूर्ति जारी रखनी होगी। क्योंकि बहुतों का परिवार व्यापारियों के साथ परोक्ष और अपरोक्ष रूप से जुड़ा होता है।
जो जरूरी हो प्रशासन कदम उठाए
रंगरेजा के निदेशक सुप्रिया द्विवेदी ने बताया कि नाइट कर्फ्यू को एक दो घंटे आगे पीछे करने से होटल इंडस्ट्री काफी नुकसान में है। पिछले वर्ष का नुकसान अभी किसी तरह भुलाने का प्रयास किया जा रहा था कि एक बार फिर से कोरोना के संक्रमण ने डरा दिया है। प्रशासन भी पहले रात नौ से सुबह छह बजे तक का नाइट कर्फ्यू लगाया था। इसके बाद समय बढ़ा दिया गया। इससे अच्छा होता कि लॉकडाउन ही लगा दे। इससे व्यापारियों का नुकसान होने से बच सकेगा और लोग भी कुछ हद तक सुरक्षित रह सकेंगे।
बाजार में दिखने लगा है डर
पीसी ज्वैलर्स के निदेशक संजय अग्रवाल ने बताया कि 22 अप्रैल से लगन है और इसके पहले ही बाजार में आने वालों के चेहरों पर डर दिखने लगा है। शादी और लगन के माहौल की वजह से सरकार पूरी तरह से लॉकडाउन नहीं लगा पा रही है। सरकार को सभी वर्गों का ख्याल रखना होता है। ऐसे में अब हमारी जिम्मेदारी है कि बिना लॉकडाउन के ही खुद को लॉक कर लें। जरूरी हो तभी बाहर निकलें वह भी कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए। रविवार के लॉकडाउन को लोगों ने भी स्वीकार किया है।
बाहर निकलें तो खुद करें लॉकडाउन महसूस
बलदेव प्लाजा के निदेशक सतीश नांगलिया ने बताया कि पिछले वर्ष कोरोना ने बाजार के साथ लोगों को तोड़कर रख दिया था। किसी प्रकार से गाड़ी पटरी पर आई तो एक बार फिर से नाइट कर्फ्यू और एक दिन के लॉकडाउन ने लोगों की आफत बढ़ा दी। हालांकि, कोविड से बचाव के लिए सरकार के इस पहल का स्वागत करेंगे। जरूरी है कि हमारे आसपास के लोग खुद में लॉकडाउन महसूस करें और बिना अत्यंत जरूरी काम से बाहर न आएं। अकेले खरीदारी करने निकलें, इससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
कोरोना की वजह से सोने-चांदी का बाजार प्रभावित
सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज कुमार गोयल ने बताया कि शुरू के तीन महीने में इस बार लगन नहीं था। अप्रैल के बाद लगातार शादियों के लगन से व्यापारियों को लगा था कि पिछले वर्ष के घाटे को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। प्रशासन ने नाइट कर्फ्यू अब आठ बजे से कर दिया है। रात में ही सोने-चांदी की खरीदारी की जाती है। आठ बजे बंदी होने की वजह से शाम छह या सात बजे से दुकानें बंद होने लगती है। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से हमारे आपके लिए ही प्रशासन ने ऐसा किया है। कोविड प्रोटोकाल के पालन के साथ ही बाजार में जाएं। हम रविवार के लॉकडाउन का स्वागत करते हैं।