यूपी प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े विधानसभा चुनावी तैयारियों की जमीनी हकीकत परखेंगे। गोरखपुर दौरे के दौरान तावड़े बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की थाह लेंगे। उनका यह दौरा भाजपा संगठन की दृष्टि से इसे काफी अहम माना जा रहा है।
यूपी में मिशन-2027 की सियासी बिसात पर भाजपा अब गोरखपुर क्षेत्र को नए सिरे से कसने की तैयारी में है। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े 17 और 18 सितंबर को गोरखपुर क्षेत्र में रहेंगे। 62 विधानसभा सीटों वाले इस क्षेत्र में वह संगठन की जमीनी स्थिति के साथ ही बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की भी थाह लेंगे।
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भाजपा के लिए यह दौरा इसलिए अहम है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन 2019 लोकसभा और 2022 के विधानसभा के लिहाज से कमजोर रहा था। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नए सिरे से तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद तावड़े सबसे पहले गोरखपुर क्षेत्र आ रहे हैं। भाजपा संगठन की दृष्टि से इसे काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी की सहयोगी दल निषाद पार्टी, अपना दल और सुभासपा का भी इसी क्षेत्र में ज्यादा प्रभाव है। पिछले चुनाव में इन दलों के प्रत्याशी भी जीते थे।
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इस बार गठबंधन में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की जोर आजमाइश कर रही हैं। इसलिए, तावड़े का दो दिन का प्रवास भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वे यहां रहकर भाजपा की तैयारियों की जमीनी हकीकत तो परखेंगे ही सहयोगी दलों की भी थाह लेंगे।
इसके अलावा इस बार पार्टी में महिलाओं की ओर से भी टिकट की दावेदारी की जा रही है। साथ ही जेनजी आंदोलन के बाद युवाओं की भी पार्टी में अहमियत बढ़ी है। इसका सीधा असर पिछले दिनों संगठन के विस्तार में देखने को मिला है।
इन सारे पहलुओं को ध्यान में रखकर पार्टी अगला सियासी कदम उठाने की तैयारी में है। तावड़े के दौरे में सिर्फ संगठन की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि विधायकों और संभावित प्रत्याशियों को लेकर जमीनी फीडबैक भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लिहाजा, तावड़े के दौरे को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।
2022 के चुनाव में 62 में 42 सीटों पर जीती थी भाजपा
भाजपा के संगठनात्मक दृष्टि से गोरखपुर क्षेत्र में कुल 62 विधानसभा क्षेत्र हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 42 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें गोरखपुर मंडल में स्थिति काफी सुदृढ़ है। 28 सीटों में से से 27 सीटों पर भाजपा व इसके सहयोगियों को जीत मिली थी।
जबकि, बस्ती मंडल में 13 में से 6 सीटें ही भाजपा को मिली थीं। बात करें आजमगढ़ मंडल की तो यहां की 21 विधानसभा सीटों में से केवल 3 भाजपा के पास हैं। इनमें 2 बलिया में और एक मऊ की सीट शामिल है।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की 9 सीटों में से भाजपा ने 6 सीटें जीती थीं, जबकि आजमगढ़ मंडल (आजमगढ़ और लालगंज) में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। यहां दोनों सीटें सपा की झोली में गई थी। ऐसे आगामी विधानसभा चुनाव काफी अहम माना जा रहा है।
सहयोगियों की नजदीकी ने बढ़ाई रणनीतिक चिंता
भाजपा की सहयोगी दल अपना दल, निषाद पार्टी और अन्य सहयोगियों के साथ सीटों और स्थानीय समीकरणों का तालमेल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। दूसरी ओर सपा की ओर सहयोगी दलों को साधने की कोशिशें भाजपा की चिंता बढ़ा सकती हैं।
पिछले दिनों निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के घर पहुंचे थे। इस मुलाकात के भी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।