देवरिया जिले की सलेमपुर लोकसभा सीट पर भाजपा इस बार हैट्रिक की तैयारी में है। रविंद्र कुशवाहा पर पार्टी ने लगातार तीसरी बार भरोसा जताया है। कुशवाहा का सीधा मुकाबला इंडी गठबंधन से सपा से मैदान में उतरे पूर्व बसपा सांसद रमाशंकर राजभर से है। राजभर, यादव और मुस्लिम का समीकरण बनाकर सपा इस सीट को छीनने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है।
बसपा ने भीम राजभर को मैदान में उतारकर राजभर बिरादरी के वोटों में बंटवारे की पटकथा लिख दी है। पर, दो राजभर प्रत्याशियों के बीच खड़े बिरादरी के मतदाता खामोशी से हवा का रुख भांप रहे हैं। यानी जिधर का पलड़ा भारी होगा, उनका झुकाव उधर ही होगा।
बसपा को इस सीट पर दो बार सफलता मिली और दोनों बार उसे राजभर प्रत्याशी उतारने का फायदा मिला। 1999 में बब्बन राजभर और 2009 में रमाशंकर राजभर को मिली सफलता को देखते हुए ही शायद उसने एक बार फिर उन्हीं समीकरणों को आजमाने की कोशिश की।
पर, 2009 में उसे जीत दिलाने वाले रमाशंकर राजभर अब साइकिल पर सवार हैं। तो दूसरी तरफ भीम राजभर बसपा के काडर वोटर के साथ ही राजभर मतदाताओं में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में राजभर मतों में बंटवारे को रोकना सपा, बसपा के लिए बड़ी चुनौती है।
भाजपा-सपा के सामने भितरघात से पार पाने की चुनौती
इस बार के चुनाव में सपा और भाजपा को गुटबाजी परेशान कर रही है। सलेमपुर सदर में सपा का बेस वोटर यादव, राजभर प्रत्याशी उतारे जाने से रुष्ट है। उनका मानना है कि रमाशंकर राजभर जीते तो यादव नेतृत्व पर संकट गहराएगा। ऐसे में पार्टी का ही एक धड़ा मौन विरोध में जुटा है। इससे पार पाने के लिए सपा संगठन को मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं, भाजपा में भी अंतर्विरोध है। एक धड़ा मान रहा है कि लगातार एक ही परिवार से प्रत्याशी बनाने से संगठन को नुकसान हो रहा है।
छह बार मिली कांग्रेस को जीत
सलेमपुर लोकसभा सीट पर 1957 से लेकर 1984 तक हुए आम चुनाव में छह बार कांग्रेस को जीत मिली। 1977 में इमरजेंसी के चलते कांग्रेस को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। भारतीय लोक दल के रामनरेश कुशवाहा 72.10 फीसदी वोट शेयर हासिल कर चुनाव जीते। पर, 1980 में मतदाताओं का मिजाज फिर बदला और सीट को कांग्रेस की झोली में डाल दिया।
1980 एवं 1984 के चुनाव में कांग्रेस को लगातार जीत मिली और दोनों बार कांग्रेस के राम नगीना मिश्रा सांसद बने। 1989 में हुए चुनाव में जनता दल के हरि केवल प्रसाद ने कांग्रेस के राम नगीना मिश्रा को पराजित किया। तब से लेकर अब तक कांग्रेस को यहां जीत नहीं नसीब हुई। 2004 और 2009 में कांग्रेस ने भोला पांडेय को उतारकर यहां वापसी के लिए जोरदार कोशिशें कीं। 2004 में पांडेय महज 16253, तो 2009 में 18305 वोटों के अंतर से हारे थे।
बलिया के मतदाता निर्णायक
सिकंदरपुर के प्रतीक पांडेय कहते हैं कि सलेमपुर सीट का क्षेत्र देवरिया और बलिया दोनों जिलों में बंटा है। देवरिया की सलेमपुर और भाटपार रानी के साथ ही बलिया जिले की बेल्थरा रोड, सिकंदरपुर और बांसडीह विधानसभा सीट को मिलाकर इस लोकसभा क्षेत्र का गठन हुआ है। इस वजह से यहां बलिया के मतदाता निर्णायक होते हैं।
बेरोजगारी और पलायन का मुद्दा
चुनावी मुद्दों के सवाल पर सलेमपुर सदर के श्रवण सिंह कहते हैं, देखिए बेरोजगारी यहां मुख्य मुद्दा है। यहां कोई उद्योग स्थापित नहीं हो सका। इसकी वजह से युवाओं को रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में भी सलेमपुर में कोई अच्छी व्यवस्था नहीं है।
जिला बनाने की मांग
सलेमपुर की अंबिका दुबे कहती हैं, सलेमपुर को लगातार जिला बनाने की मांग की जा रही है। पर, मामला ठंडे बस्ते से बाहर ही नहीं आ पा रहा है। आचार संहिता लगने से पहले सलेमपुर में बस स्टेशन का शिलान्यास हुआ। रात आठ बजे के बाद अन्य शहरों के लिए यहां से कोई बस नहीं मिलती। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। बाहर की ट्रेनों की संख्या भी यहां से न के बराबर है।
राष्ट्रीय मुद्दों, समीकरणों की भी मतदाताओं में चर्चा
भाजपा सांसद के घर के पास ही संभ्रांत लोगों की टीचर्स कॉलोनी है। कॉलोनी में रहने वाले विनय उपाध्याय चुनावी चर्चा छिड़ते ही कहते हैं, देखिए हम प्रत्याशी को नहीं, मोदी और योगी को देख रहे हैं। राष्ट्रीय मुद्दों को देख रहे हैं। बलिया जिले की बेल्थरा रोड रेलवे स्टेशन निवासी श्याम राजभर कहते हैं, चुनाव रोचक नहीं अब रोमांचक दौर में है। जातीय समीकरणों में मजबूत कुशवाहा और राजभर यहां का परिणाम तय करते हैं। भाजपा ने अगर प्रत्याशी बदला होता, तो लड़ाई में कोई होता ही नहीं। प्रत्याशी में बदलाव नहीं होने से कुछ लोग जरूर छिटके हैं। सपा ने पूर्व सांसद को मैदान में उतारकर बड़ी रणनीतिक समझदारी दिखाई है।
मईल चौराहा निवासी प्रतीक सिंह कहते हैं कि सभी समीकरणों को पीछे छोड़ दें तो इस बार एक नया संदेश बसपा के काडर वोटरों का है। वे यह परख रहे हैं कि कौन जीत रहा है। वे अपना मत सिर्फ सिंबल के नाम पर बर्बाद नहीं करना चाहते हंै। ऐसे में लड़ाई रोमांचक होनी तय है।
विधानसभा क्षेत्रों का सियासी समीकरण
सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर भाजपा, सपा और सुभासपा का एक-एक सीट पर कब्जा है। जिलावार देखें तो देवरिया की दोनों सीटें भाजपा के पास हैं। बलिया जिले की तीन सीटों में से सपा, भाजपा व सुभासपा के पास एक-एक विधानसभा सीट है।
जातीय समीकरण में पिछड़ी जातियों का दबदबा
लोकसभा क्षेत्र में पिछड़ी जातियों का दबदबा है। यहां कुर्मी व कुशवाहा समाज के करीब 18 फीसदी मतदाता हैं। राजभर, ब्राह्मण व अनुसूचित जाति 15-15 फीसदी, मुस्लिम व यादव 13-13 फीसदी और क्षत्रिय 4 फीसदी हैं। वैश्य व निषाद बिरादरी के करीब तीन फीसदी मतदाता हैं।
2014 का जनादेश
| पार्टी |
प्रत्याशी |
मत |
| रविंद्र कुशवाहा |
भाजपा |
3,92,213 |
| रविशंकर सिंह |
बसपा |
1,59,871 |
| हरिबंश सहाय कुशवाहा |
सपा |
1,59,688 |
2019 का जनादेश
| पार्टी |
प्रत्याशी |
मत |
| रविंद्र कुशवाहा |
भाजपा |
4,67,940 |
| आरएस कुशवाहा |
बसपा |
3,55,325 |
| राजेश कुमार मिश्रा |
कांग्रेस |
27,363 |