उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के मानबेला के सैकड़ों किसानों के लिए राहत भरी खबर है। उनकी मांग के अनुरूप अब बढ़ी दर पर मुआवजे की राह खुल गई है। जनपद न्यायाधीश न्यायालय ने किसानों के पक्ष में फैसला किया है। ब्याज और अन्य देय समेत मुआवजे की रकम देने का आदेश दिया है। यह करीब 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर होगी।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को यह रकम जनपद न्यायाधीश न्यायालय में जमा करनी होगी। कोर्ट जानेवाले सभी किसानों को वहीं से मुआवजा मिलेगा। बाकी किसानों को डीएम के पास प्रार्थनापत्र देना होगा, जिसके बाद उन्हें जीडीए से मुआवजा मिलेगा। उधर, प्राधिकरण ने कोर्ट के आदेश के बाद शासन से विधिक राय मांगी है। शासन से सहमति मिलते ही बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।
मुआवजा बढ़ाने की मांग के संबंध में कई वर्षों से चल रही किसानों की लड़ाई को सांसद रहते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही बल दिया था। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने मानबेला के किसानों का मामला सुलझाने के लिए पहल शुरू कर दी। साल 2017 में योगी के निर्देश पर किसानों और जीडीए के बीच समझौते के लिए कमेटी बनाई गई। कमेटी ने 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने का निर्णय दिया था। किसान इस पर सहमत थे, मगर जीडीए ने बाद में इसमें ब्याज का पेच लगा दिया।
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अधिग्रहण के वक्त 18 लाख प्रति हेक्टेयर था मुआवजा
प्राधिकरण का कहना था कि पूर्व में तय मुआवजे की दर से अधिक जो भी रकम किसानों को दी जाएगी उस पर ब्याज काटा जाएगा। किसान इस पर सहमत नहीं हुए। उन्होंने जनपद न्यायाधीश न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी। मानबेला के एक किसान मो. शमीम ने पूर्व में अधिग्रहण के समय तय दर पर भुगतान करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। बाद में उन्होंने केस वापस ले लिया। इधर, अब जनपद न्यायाधीश ने किसानों के पक्ष में फैसला करते हुए ब्याज समेत बढ़ा हुआ मुआवजा कोर्ट में जमा करने का आदेश जीडीए को सुनाया है, ताकि किसानों में उसे वितरित किया जा सके।
जीडीए ने मानबेला में करीब 215 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की है। वर्ष 2009 में यह अवार्ड हुआ। उस समय प्राधिकरण ने 18 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा तय किया था। बाद में इसे बढ़ाकर 28 लाख रुपये किया गया। करीब 400 किसानों को 18 लाख की दर पर मुआवजा मिला, जबकि 100 किसानों को करार के तहत 28 लाख रुपये की दर पर दिया गया। मगर किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे थे। उनके विरोध की वजह से जीडीए कोई परियोजना नहीं संचालित कर पा रहा था। मुख्यमंत्री की पहल पर समझौते के बाद मुआवजे की दर 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर करने पर सहमति बनी, मगर जीडीए ने मुआवजे में पेच फंसा दिया। जिस पर करीब 70 किसानों ने जनपद न्यायाधीश के न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी।
ब्याज का मामला फंसने पर करीब 70 किसानों ने जनपद न्यायाधीश के कोर्ट में रिट दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने जीडीए को ब्याज समेत करीब 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से कोर्ट में मुआवजे की राशि जमा करने का आदेश सुनाया है। मगर जो किसान कोर्ट नहीं गए उन्हें भी बढ़े हुए मुआवजे का लाभ मिल सकेगा। इसके लिए उन्हें भू-अधिग्रहण की धारा 28 ए के तहत डीएम के पास प्रार्थनापत्र देना होगा।
किसानों में खुशी, सीएम के प्रति जताया आभार
न्यायालय से पक्ष में फैसला आने के बाद मानबेला के सैकड़ों किसानों के चेहरे पर खुशी दिखी। एक दशक से चल रही लड़ाई मुकाम तक पहुंचने पर हर कोई उत्साहित है। सभी किसानों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। कहा कि उन्हीं की वजह से सभी किसानों की जमीन की सही कीमत मिलने की राह बन पाई। मानबेला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष बरकत अली ने कहा कि मुख्यमंत्री शुरू से किसानों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने मानबेला के सैकड़ों किसानों की सुध ली। कमेटी बनाई और 18 लाख रुपये से बढ़ाकर 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे की राशि की। आभार व्यक्त करने वालों में बेचन निषाद, भोला, अमूल निषाद, राम उजागर शर्मा, सागर शर्मा, हमीदुल्लाह अंसारी, रिजवान खान समेत सैकड़ों किसान शामिल हैं।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि मानबेला के किसानों को ब्याज व अन्य देय समेत करीब 71 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने के संबंध में जनपद न्यायाधीश ने आदेश सुनाया है। कोर्ट की कॉपी मिल गई है। शासन से इस संबंध में विधिक राय मांगी गई है। वहां से दिशा-निर्देश मिलने के बाद बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। जो निर्णय होगा, उसका पालन किया जाएगा।