राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालयों के विकसित होने का पैमाना सिर्फ विद्यार्थियों या डिग्री धारकों की बढ़ती संख्या ही नहीं होता। विश्वविद्यालय परिसरों में आधारभूत ढांचे और कार्य निष्पादन की गति तेज करने वाले निकायों की भी बड़ी आवश्यकता होती है। विकसित भारत-2047 की संकल्पना को पूरा करने के लिए जरूरी है कि विश्वविद्यालय अपने अनुसंधान पक्ष को मजबूत करें। अधिक से अधिक समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा दें, जिससे सामाजिक दायित्वों का निर्वहन हो सके।
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल सोमवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में नए परीक्षा मूल्यांकन भवन का ऑनलाइन शिलान्यास करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने जनगणना कार्य निदेशालय, केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ‘सेंसस डाटा रिसर्च वर्क स्टेशन’ का भी शुभारंभ किया। कुलाधिपति ने कहा कि इस परियोजना से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति से अपेक्षा है कि वे निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण ढंग से निर्मित कर इसे लोकार्पित कराने का प्रयास करें, जिससे विश्वविद्यालय को इसका लाभ मिल सके। कहा कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में गोरखपुर विश्वविद्यालय ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में अग्रणी भूमिका का निर्वहन किया है। नए पाठ्यक्रमों का निर्माण कर विश्वविद्यालय ने ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
सेंसस डाटा रिसर्च वर्कस्टेशन से बढ़ेगा शोध
कुलाधिपति ने कहा कि सेंसस डाटा रिसर्च वर्क स्टेशन का शुभारंभ विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसकी स्थापना से पूर्वांचल सहित इस क्षेत्र के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं जन-सामान्य के लिए व्यापक अनुसंधान का वातावरण एवं अवसर मिलेगा। आज दुनिया भर की सरकारों से लेकर बड़े औद्योगिक संस्थानों तक को भविष्य की अपनी योजनाएं बनाने के लिए इस प्रकार के आंकड़ों की आवश्यकता होती है। इस पर आधारित शोध के परिणाम हमारे आसपास के जीवन में बदलाव ला सकते हैं।
नियमित सत्र और सकारात्मक वातावरण प्राथमिकता: कुलपति
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि उत्तर प्रदेश का यह चौथा सेंसस डाटा रिसर्च वर्कस्टेशन है और विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व का अवसर है। किसी राज्य विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाला यह केवल दूसरा ऐसा केंद्र है। विश्वविद्यालय की प्रगति से कुलाधिपति को अवगत कराते हुए कुलपति ने कहा कि परीक्षाओं के समय से संपन्न हो जाने के बाद हमने परीक्षा परिणाम घोषित करना प्रारंभ कर दिया है और संभवतः हम पहले राज्य विश्वविद्यालय हैं जो इसी सप्ताह से नए सत्र के लिए प्रवेश परीक्षाएं शुरू करने जा रहे हैं। सत्र नियमन, सकारात्मक वातावरण और उत्कृष्टता हमारी प्राथमिकता है।
नए मूल्यांकन भवन का हुआ भूमिपूजन
कुलपति प्रो. पूनम टंडन में रीति रिवाज से नए मूल्यांकन भवन का भूमि पूजन किया। इसके बाद ‘सेंसस डाटा रिसर्च वर्क स्टेशन’ को विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी के साइबर लाइब्रेरी में स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन व जनगणना कार्य निदेशालय के संयुक्त निदेशक ने हस्ताक्षर भी किया जाएगा। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव सुधीर बोबडे, ओएसडी डाॅ. पंकज एल जानी एवं जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक शीतल वर्मा भी ऑनलाइन जुड़ी रहीं। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. तूलिका मिश्रा व धन्यवाद ज्ञापन डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे ने किया।