गोरखपुर जिले के गीडा इलाके के भड़सार गांव में मारपीट की घटना पुलिस की सुस्त कार्रवाई की वजह से धीरे-धीरे जातीय रंग लेने लगी है। अब तक दो पक्षों के बीच का विवाद गुरुवार को सवर्ण बनाम अनुसूचित जाति में बदल गया है। गांव में बिगड़े हालात को देखते हुए डेढ़ सेक्शन पीएसी तैनात कर दी गई है।
उधर, दिन में दूसरे पक्ष के लोगों ने एसएसपी दफ्तर पर प्रदर्शन कर एससीएसटी की धारा को हटाए जाने की मांग की है। समर्थन में करणी सेना, ब्राह्मण संघर्ष मोर्चा के लोग भी पहुंचे थे। पुलिस ने दूसरे पक्ष की तहरीर पर सात लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने, धमकी देने, चाकू या किसी असलहा का इस्तेमाल करने की धारा में नामजद केस दर्ज किया है।
ये है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, दिवाली के दिन भड़सार गांव में मारपीट की घटना हुई थी। अनुसूचित जाति के लोगों का कहना था कि उनके घर की बेटियां और बहू निकली थीं और उनके साथ छेड़खानी की गई। विरोध करने पर मारपीट हुई, असलहा लहराया गया।
मामले में कार्रवाई ना होने पर मंगलवार को थाने पर प्रदर्शन किया गया। अफसरों के संज्ञान में मामला आने पर एसपी नार्थ अरविंद पांडेय गांव में जांच करने पहुंचे थे। जांच के बाद पुलिस ने दावा किया कि छेड़खानी नहीं हुई, लेकिन मारपीट दोनों पक्ष में हुई है।
इस आधार पर अनुसूचित जाति पक्ष से आई तहरीर पर पुलिस ने मारपीट, एससीएसटी एक्ट का केस दर्ज कर लिया। अब दूसरे पक्ष की ओर से सुधांशु शुक्ला की तहरीर पर हरेंद्र, विशाल, इंद्रजीत, जितेंद्र, जगदीश, विक्रम, सोनू सहित कई अज्ञात पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।