इतने ही नमूने रोज गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों से आ रहे हैं। इसकी वजह से आरएमआरसी के सामने नया संकट आ खड़ा हो गया। दूसरी तरफ माइक्रोबायोलॉजी विभाग में टीबी की सीबीनैट मशीन से होने वाली जांच किट के अभाव में बंद है। यही वजह है कि आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दो नई आरटीपीसीआर मशीन मंगवाई हैं।
मेडिकल कॉलेज में दो बायोसेफ्टी कैबिनेट लगे हैं। लेकिन जांच बढ़ने के कारण दो और बॉयोसेफ्टी कैबिनेट की मांग की गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बॉयोसेफ्टी कैबिनेट में बैठकर कोरोना जांच के लिए नमूने लेने से संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि दो आरटीपीसीआर मशीन आ गई हैं। एक से दो दिनों के अंदर उनसे भी जांच शुरू हो जाएगी। इसके बाद से प्रतिदिन 500 जांचें होंगी। आने वाले दिनों में इन मशीनों में नई तकनीक की डाई लगाकर इनकी क्षमता और बढ़ाई जाएगी। इसके बाद लगभग 750 जांच रोजाना होना संभव हो सकेगा। दो बायोसेफ्टी कैबिनेट भी जल्द ही मिलने वाले हैं।