उम्र के जिस पड़ाव पर बुजुर्गों को सहारे की जरूरत है, वहीं दो बुजुर्ग खुद के जिंदा होने का सबूत लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इन्हें कागजों में मृत दिखा दिया गया है। सिस्टम की चूक का खामियाजा भुगत रहे ये बुजुर्ग अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, साहब मैं जिंदा हूं...पेंशन दिला दीजिए।
दोनों बुजुर्ग जंगल कौड़िया ब्लॉक के रहने वाले हैं। फुलवरिया निवासी राधेश्याम की वृद्धावस्था पेंशन पिछले 9 माह से नहीं आ रही है। उन्हें जांच रिपोर्ट में मृत घोषित किए जाने की जानकारी मिली। राधेश्याम ने एडीओ समाज कल्याण को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि वह जीवित हैं। इसके बाद दस्तावेजों की जांच हुई तो पता चला कि राधेश्याम को सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारियों ने मृत घोषित कर दिया।
दूसरा मामला कहरपुरवा गांव का है। यहां के रामकेशर की पेंशन भी रुकी हुई है। उन्हें भी कागजों में मृत दिखा दिया गया है। रामकेशर ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से लगातार ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें वह खुद को कागजों में मृत बताए जाने की बात कह रहे हैं।
एडीओ समाज कल्याण उदय सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व रामकेशर से परिवार रजिस्टर की नकल मांगी थी। सचिव के न आने के कारण उन्हें यह नकल नहीं मिल सकी। गुहार लगाने के बाद भी राहत न मिलने पर रामकेशर ने बीडीओ से मिलकर उन्हें मामले से अवगत कराया। बीडीओ के अनुसार, रामकेशर का आधार कार्ड अपडेट नहीं है। जबकि, रामकेशर का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें कागज में मृत दिखाया है। अब मामले में लीपापोती की जा रही है। दस्तावेजों की जांच करा लें और कागजों में मुझे जिंदा कर दें ताकि पेंशन आने लगे।राधेश्याम के दस्तावेज जिला स्तरीय अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं। वह जीवित हैं। रामकेशर का परिवार रजिस्टर की नकल बनाने के लिए सचिव को निर्देशित किया गया है। मामले की जांच की जाएगी। पेंशन दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। -सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, बीडीओ, जंगल कौड़िया
मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दोनों वृद्धजनों को वृद्धा पेंशन दिलाई जाएगी। -महेंद्र कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी