आयोजन समिति संयोजक ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार प्रो डीपी सिंह, भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो संजय सिंह, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सेंटर ऑफ पर्सियन एंड सेंट्रल एशियन स्टडीज के प्रो मजहर आसिफ, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो सदानन्द प्रसाद गुप्त, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ रामानंद, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार के प्रो आशीष श्रीवास्तव (डीन, स्कूल ऑफ एजुकेशन), शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ में शिक्षा संकाय की डीन प्रो रजनी रंजन सिंह, भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो राजशरण शाही समेत कई शिक्षाविदों का मार्गदर्शन इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राप्त होगा। नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय कोहिमा में शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रो ज्ञानेंद्र नाथ तिवारी तथा लखनऊ विश्वविद्यालय, भौतिक विज्ञान विभाग की प्रो पूनम टंडन राष्ट्रीय संगोष्ठी में वर्चुअल जुड़कर अपने विचार व्यक्त करेंगी।
बकौल शिप्रा सिंह, किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके कार्यान्वयन पर निर्भर करती हैं। इस परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक भारत की पुनर्प्रतिष्ठा के उद्देश्यों के अनुरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन को संपूर्णता की ओर अग्रसर करने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी में गहन विचार विमर्श किया जाएगा। दो दिवसीय इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा से लेकर वैश्विक स्तर तक भारत की भूमिका जैसे कुल 21 उप विषयों या शीर्षकों पर शोध प्रपत्र भी प्रस्तुत किए जाएंगे।