एप के जरिए बीट दी जाती है, जिसके एवज में रुपये लगाने होते हैं और फिर लोग अपना रुपया हार कर गंवा देते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि बचने के लिए यह अपने खातों का इस्तेमाल न कर इसके लिए गरीबों के खातों का इस्तेमाल करते हैं। एसएसपी ने बताया कि जैमिनी अपार्टमेंट में लक्ष्मीना नाम की एक महिला झाड़ू-पोछा करती थी। यही पर उसकी मुलाकात संजय से हो गई। एएसपी अंशिका वर्मा की जांच में पूरा मामला खुला है।
मुंबई में बैठकर जालसाजों ने लोगों को कसीनो की चकरघिन्नी में फंसाकर करोड़ोंं की ठगी कर ली। पुलिस ने शहर में संचालित ऑफिस का पर्दाफाश करते हुए गिरोह में शामिल दो स्थानीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों, नौकरानी या किसी भी गरीब आदमी का खाता खोलकर जालसाजी में उसी का इस्तेमाल करते थे।
आरोपियों के पास से पुलिस ने बैंक के पांच पासबुक, 10 मोबाइल फोन, सात लैपटॉप और 11 लाख तीन हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस मुंबई के जालसाजों के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
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पकड़े गए आरोपियों की पहचान कोतवाली इलाके के पुर्दिलपुर निवासी संजय चौरसिया और सिद्धार्थनगर के खेसरहा थाना क्षेत्र के कड़जा निवासी अजय ठाकुर के रूप में हुई है। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पकड़े गए आरोपियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जालसाजों ने कई एप बनाया है। इससे लोगों को ऑनलाइन रुपये जीतने का लालच देकर ठगी करते हैं।
उन्होेंने बताया कि एप के जरिए बीट दी जाती है, जिसके एवज में रुपये लगाने होते हैं और फिर लोग अपना रुपया हार कर गंवा देते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि बचने के लिए यह अपने खातों का इस्तेमाल न कर इसके लिए गरीबों के खातों का इस्तेमाल करते हैं।
एसएसपी ने बताया कि जैमिनी अपार्टमेंट में लक्ष्मीना नाम की एक महिला झाड़ू-पोछा करती थी। यही पर उसकी मुलाकात संजय से हो गई। लक्ष्मीना ने उससे अपनी गरीबी बताई तो संजय ने काली मंदिर के पीछे अपने ऑफिस पर बुलाया। वहीं पर उसने सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी और फिर लक्ष्मीना सहित 20 लोगों का बैंक में खाते खुलवा दिए।
इन खातों का इस्तेमाल वह खुद करता था। ऑनलाइन कसीनो पर बीट लगवाता था और फिर पहले राउंड में रुपये आते दिखता था, लेकिन बाद में लोग हार जाते थे। इस तरह से यह पूरा धंधा चल रहा था।
एसएसपी ने बताया कि एक खाते के बदले जालसाज गरीब लोगों को पांच से 10 हजार रुपये भी दिया करते थे। लक्ष्मीना ने ही पुलिस ऑफिस में आकर शिकायत की, जिसके बाद पूरे प्रकरण की जांच एएसपी अंशिका वर्मा को सौंपी गई थी। जांच में पूरा मामला सामने आने के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आईएएस अंशिका वर्मा।
- फोटो : अमर उजाला।
एएसपी की जांच में खुला मामला
एएसपी अंशिका वर्मा की जांच में पूरा मामला खुला है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह आपसी विवाद सामने आया है। एसएसपी ने बताया कि लक्ष्मीना और अन्य को हर महीने रुपये मिल रहे थे, लेकिन अचानक लक्ष्मीना की भाभी को पता चला कि उसके खातों में लाखों रुपयों का आदान-प्रदान हुआ है तो उन्हें महीने में मिलने वाली रकम कम लगने लगी।
इसे लेकर विवाद हुआ तो महिलाएं भी डर गई थीं, क्योंकि उन्हें लगा कि खाते का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद पुलिस ऑफिस आकर लक्ष्मीना ने शिकायत की थी, इसके बाद पूरे प्रकरण की जांच एएसपी को सौंपी गई थी और मामला खुलकर सामने आया।
एप पर दिखने वाली रकम भी होती थी झूठी
पुलिस की जांच में पता चला है कि एप पर दिखने वाली रकम भी झूठ होती थी। मसलन अगर एप पर यह दिख रहा था कि खाते में आठ हजार आप जीत गए हैं तो यह भी फर्जी था। अगर उस रकम को खाते में लेने की कोशिश करते थे, नहीं आता। यानी हर तरीके से इस एप पर आने वाले लोग ठगी का शिकार ही होते हैं।
20 खाते एक ही पते पर...बैंक की भूमिका भी संदिग्ध
बिना केवाईसी, भौतिक सत्यापन के ही खोल दिए गए खाते, एसएसपी ने बैंक को भेजा पत्र
आठ महीने से गोरखपुर में संचालित हो रहा था जालसाजों का ऑफिस, तेज की गई जांच
जांच नें ये मामला प्रकाश में आया
पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर गिरोह का पर्दाफाश तो कर दिया, लेकिन एक बहुत गंभीर बात भी सामने आई है। बैंक ने अपना टारगेट पूरा करने के चक्कर में बिना केवाईसी, भौतिक सत्यापन के ही खाता खोल दिया। जिन महिलाओं का खाता खोला गया था, उन सभी का पता जालसाजों ने पुर्दिलपुर ऑफिस को ही बताया था, फिर भी इसका सत्यापन नहीं किया गया।
ऐसे में अगर इन खातों का इस्तेमाल किसी आतंकी घटना के लिए होता तो फिर बैंक अफसर भी बच नहीं पाते और यह देश के लिए भी खतरे की बात है। यही वजह है कि एसएसपी ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए बैंक को भी पत्र भेजा है, ताकि भविष्य में ऐसी गलती न सामने आए।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि पिछले सात-आठ महीने से गोरखपुर में फर्जीवाड़ा का खेल चल रहा था। इस दौरान रोजाना एक बैंक खाते से लाखों रुपये का टर्न ओवर हो रहा था, लेकिन बैंक ने कभी भी ध्यान नहीं दिया कि बचत खाता में इतने रुपये कहां से आ और जा रहे हैं।
जबकि, एक लाख रुपये के टर्न ओवर पर ओटीपी आती है और बिना इसके बचत खाता से रकम का आदान-प्रदान नहीं होता, लेकिन इन सब बातों पर ध्यान नहीं देने की वजह भी पुलिस जांच रही है।
एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि पुलिस ने ऑनलाइन बीट लगावाकर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ऑफिस खोलकर घर में काम करने वाले गरीब लोगाें को झांसे में लेकर खाता खुलवाते थे और उसी का इस्तेमाल करते थे।
लोगों से अपील है कि वह किसी के कहने पर खाता न खोलें, अगर उन्हें जरूरत है तो खुद बैंक जाकर ही खाता खोलें और उसके पासबुक व अन्य दस्तावेज को अपने पास रखें। बैंक की ओर से भी लापरवाही सामने आई है, पुलिस की ओर से पत्राचार किया जा रहा है।