बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ कालाजार का इलाज
मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर)। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में अब कालाजार के मरीजों को भी मुफ्त इलाज मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज को कालाजार ट्रीटमेंट सेंटर बनाया है। कालाजार ट्रीटमेंट सेंटर में मेडिसिन, शिशु रोग, चर्म रोग और माइक्रो बायोलॉजी विभाग शामिल होंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कालाजार जांच की किट और इलाज में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन की पहली खेप शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसआईसी को उपलब्ध कराई गई।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि कालाजार रोग को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस बीमारी के इलाज के लिए केंद्र बनाया गया है। मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी सेंटर को इस बीमारी की जांच के लिए के 39 किट उपलब्ध कराई गई है। रोग ग्रस्त मरीज को एक दिन भर्ती कर एंबीसोन वैक्सीन की चार से छह डोज दी जाती है।
निशुल्क है व्यवस्था
कालाजार के एक मरीज के इलाज में एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन सरकार की ओर से यह निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। एंबीसोन वैक्सीन भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसआईसी डॉ. गिरीश चंद्र श्रीवास्तव को उपलब्ध कराई गई। एसआईसी डॉ. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि डीएमओ डॉ. अरविंद पांडेय और एनजीओ पार्थ के समन्वयक डॉ. ज्ञानचंद पांडेय ने कालाजार की जांच किट और वैक्सीन उपलब्ध कराई।
एंटीबायोटिक से खत्म नहीं होता कालाजार
कालाजार लीश्मानिया नामक परजीवी के संक्रमण से होने वाला रोग है। सैंड फ्लाई या बालू मक्खी के जरिए होने वाले इस रोग से ग्रस्त मरीज की त्वचा पर गहरे भूरे या काले रंग के धब्बे पड़ जाते हैं, इसलिए इसे कालाजार नाम दिया गया है। रोग बढ़ने पर मरीज की तिल्ली, जिगर और अस्थिमज्जा यानी बोनमैरो प्रभावित हो जाता है। यदि इलाज मेें लापरवाही बरती गई तो मौत हो सकती है। एसआईसी डॉ. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार 15 दिन बुखार आता है और किसी भी एंटीबायोटिक से रोग समाप्त नहीं होता, तो वह कालाजार से पीड़ित हो सकता है।
कालाजार के मरीजों को बीआरडी रेफर करने का निर्देश
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि कालाजार रोग विशेषकर बिहार, सीवान इलाके मेें ज्यादा है। इस इलाके से आने वाले मजदूर, ईंट भट्ठा कारीगर कालाजार संक्रमण से ग्रस्त होते हैं। पूर्वांचल मेें कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज में ही ऐसे रोगी अधिक पाए जाते हैं। कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज के स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि उनके यहां इस बीमारी से पीड़ित कोई व्यक्ति आता है, तो उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए। इसके अलावा कालाजार रोगी सीधे भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज आ सकते हैं, उनकी जांच और इलाज मुफ्त उपलब्ध होंगे।