एक साल बाद भी निर्धारित नहीं हुआ रूट
एक दिसंबर, 2022 को संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में ई-रिक्शा संचालन के लिए जोन व रूट निर्धारण का निर्णय लिया गया था। एक माह के अंदर प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक हो गए, न जोन निर्धारित हो पाए और न ही रूट। हालांकि, परिवहन विभाग ने छह महीने पहले महानगर को पांच जोन में बांटकर 22 रूट का निर्धारण कर ई-रिक्शा के अलग-अलग रंग का चयन कर प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन उसे भी धरातल पर नहीं लाया जा सका और जिम्मेदार भूल गए।
रात में बंद कर देते हैं लाइट
ज्यादातर ई-रिक्शा चालक यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बैट्री डिस्चार्ज न हो, इसलिए ज्यादातर ई-रिक्शा वाले रात में हेडलाइट तक नहीं जलाते हैं। इससे सामने से आ रहे वाहन चालकों को ई-रिक्शा दिखता ही नहीं। इसके चलते भी हादसे हो जाते हैं।
यूनिक कोड जारी करने के नाम पर खानापूर्ति
जिले में ई-रिक्शा चालकों के पहचान के लिए परिवहन विभाग की ओर से ई-रिक्शा को यूनिक आईडी जारी की जा रही है। परिवहन विभाग ने कर्मचारी नहीं होने का हवाला देते हुए एक ई-रिक्शा समिति को यूनिक आईडी जारी करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। इस समिति ने बिना जांच पड़ताल के ही बहुत सारे ई-रिक्शा चालकों यूनिक आईडी दे दी है।
केस एक
सितंबर में शाहपुर थाना क्षेत्र के असुरन चौक पर सुबह डिवाइडर से ई-रिक्शा टकराने से पलट गया, हादसे में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वह मऊ जिले के घोसी सबरहत निवासी कांति देवी थी। शाहपुर में अपने एक रिश्तेदार के घर आई थीं।
केस दो
अक्तूबर में रुस्तमपुर का एक परिवार ई-रिक्शा से जा रहा था। इसमें बच्चे और बुजुर्ग भी सवार थे। नाबालिग चला रहा था। महेवा मंडी के समीप चालक की लापरवाही से ई-रिक्शा पलट गया। हादसे में दो महिलाएं घायल हो गई, जबकि बच्चे और बुजुर्ग को भी मामूली चोट आई।