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गोरखपुर: दिग्विजयनाथ की नई प्रतिमा शिफ्ट करते समय ट्रॉला धंसा, जानिए क्यों बदली गई प्रतिमा और जगह

Wed, 25 Aug 2021 02:56 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

रामगढ़ताल स्थित महंत दिग्विजयनाथ पार्क में लगनी है दिग्विजयनाथ की 12.5 फ़ीट ऊंची आदमकद प्रतिमा। प्रतिमा में दिग्विजयनाथ का पूरा अक्स नहीं दिखाई पड़ने पर बदली गई प्रतिमा।
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दिग्विजयनाथ की प्रतिमा शिफ्ट करते समय ट्रॉला धंसा - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर सर्किट हाउस के पास बने महंत दिग्विजयनाथ पार्क में स्थापित महंत दिग्विजयनाथ की करीब 12.5 फीट ऊंची प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा दूसरी जगह स्थापित करते समय ट्रॉला मिट्टी में धंस गया। बुधवार की दोपहर 12 बजे चबूतरे समेत प्रतिमा को जैसे ही क्रेन की मदद से ट्रॉले पर रखकर उसे आगे बढ़ाया गया। ट्रॉला का पहिया जमीन गीली होने की वजह से मिट्टी में धंस गया। करीब एक घंटे तक ट्रॉला को निकालने के लिए जीडीए के कर्मचारी और काम करा रही फर्म के कर्मचारी पसीना बहाते रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
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दरअसल, पार्क में पूर्व में स्थापित महंत दिग्विजयनाथ की प्रतिमा में उनका पूरा अक्स ही नहीं दिख रहा था। इसकी जानकारी होने के बाद से ही जिम्मेदार अफसरों के हाथ पांव फूल गए थे।  पिछले साल ही यह प्रतिमा पार्क में स्थापित की गई थी। कोरोना का दौर शुरू होने से प्रतिमा का अनावरण नहीं हो पाया है।

अब नई प्रतिमा बनाई गई है। साथ ही प्रतिमा का स्थान बदलकर अब सर्किट हाउस की तरफ पार्क परिसर में किया जा रहा है। ज्यादा नुकसान न हो इसलिए जीडीए ने चबूतरे समेत पूरी प्रतिमा को उठाकर नई जगह शिफ्ट करने का निर्णय किया है। शिफ्टिंग का काम चल ही रहा था कि ट्रॉला फंस गया।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर बना था पार्क

करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस से सटे खाली जगह को नुमाईश पार्क के तौर पर विकसित करने का निर्देश दिया था। जीडीए ने इसका निर्माण कराया। बाद में नुमाईश ग्राउंड का नाम बदलकर मंहत दिग्विजयनाथ पार्क कर दिया गया।

पिछले साल के शुरू में ही मुख्यमंत्री ने वहां महंत दिग्विजयनाथ की आदमकद प्रतिमा लगाने का निर्देश दिया था। प्रतिमा तैयार करने की जिम्मेदारी संस्कृति विभाग लखनऊ को सौंपी गई थी। तय समय के भीतर प्रतिमा तैयार कर विभाग ने जीडीए को उपलब्ध भी करा दी। फिर प्राधिकरण ने उसे स्थापित भी कर दिया।
 
मुख्यमंत्री ने ही पकड़ी थी खामी
कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने से पहले गोरखपुर आगमन के दौरान एक बार मुख्यमंत्री ने प्रतिमा का चेहरा देखने की इच्छा जताई थी। अफसरों ने जब चेहरा दिखाया तो वह चौंक गए। दरअसल प्रतिमा के चेहरे में महंत दिग्विजयनाथ का पूरा अक्स ही नहीं दिख रहा था। मुख्यमंत्री ने इसपर नाराजगी भी जताई थी।
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