- गोरखपुर से लखनऊ तक रेल मार्ग के किनारे दीवार बनाएगा एनईआर
- दीवार कंक्रीट की होगी या स्टील की इसपर जल्द होगा निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर-लखनऊ रूट की ट्रेनें लेट नहीं होंगी। उनकी गति बढ़ाने, दुर्घटनाओं और भूमि अतिक्रमण रोकने के साथ ही लेटलतीफी पर विराम लगाने के लिए गोरखपुर से लखनऊ के बीच रेलमार्ग के किनारे दीवार चलाई जाएगी। दीवार स्टील की होगी या कंकरीट की। इसपर निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन जल्द ही निर्णय लेकर काम शुरू होगा।
ट्रेनों के सामने पशु के आ जाने से इंजन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, ट्रेनें भी देर होती हैं। गोरखपुर से लखनऊ के बीच भी कई स्थल ऐसे हैं, जहां अक्सर पशुओं के कटने और मानव दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में ट्रेनों के निर्बाध संचालन के लिए रेलवे प्रशासन ने रेलमार्ग के किनारे दीवार चलाने की योजना तैयार की है।
हालांकि पूर्वोत्तर रेलवे ने पिछले साल से ही दीवार चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 138 किमी रेल लाइनें चिन्हित की गई हैं, जिनमें लखनऊ मंडल में 75 किमी, इज्जतनगर मंडल में 10 किमी और वाराणसी मंडल में 53 किमी मार्ग शामिल हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे ने 68 किमी रेलमार्ग पर कंकरीट का दीवार लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। लखनऊ मंडल में आनंदनगर-कैंपियरगंज, नकहा जंगल- कौड़िया, जगतबेला-सहजनवां, सहजनवां- मगहर, मुंडेरवा, पुरानी बस्ती, गोंडा, स्वामीनारायण छपिया आदि रेलखंड चिन्हित हैं। गोरखपुर से मनकापुर के बीच मोतीगंज-झिलाई खंड की रेल लाइनों के किनारे स्लीपर की दीवारें लगभग तैयार कर ली गई हैं।
कोट
पूर्वोत्तर रेलवे में पटरियों पर जानवरों को आने से रोकने के लिए संवेदनशील खंडों को चिन्हित कर वहां पर दीवार बनाने का कार्य प्रगति पर है। गोरखपुर से लखनऊ के मध्य गति बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं। इस खंड में समानांतर चहारदीवारी लगाने की योजना है।
- पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे