- भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर करेंगी प्रसन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भाद्रमास माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (सोमवार) को हरितालिका तीज मनाई जाएगी। सुहागिनें पति की लंबी उम्र की कामना के लिए निर्जल व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, सोमवार को भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि का मान सुबह में 10 बजकर 27 मिनट तक है, उसके बाद चतुर्थी तिथि है। वहीं चित्रा नक्षत्र सुबह 11 बजकर 15 मिनट तक है। उसके बाद स्वाती नक्षत्र है।
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बाजारो में बढ़ी चहल-पहल, सुहागिनों ने सामानों की खरीदारी की
हरितालिका तीज को लेकर बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई। शहर के गोलघर, असुरन चौक, आर्यनगर, गोरखनाथ, घंटाघर, रेतीचौक, बक्शीपुर, बेतियाहाता, पांडेयहाता आदि बाजारों में लोगों की भीड़ देखने को मिली। लोगों ने सुहाग के सामानों की खरीदारी की। वहीं कई महिलाएं मेहंदी लगवाती हुई नजर आईं।
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हरितालिका तीज व्रत का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। महिलाएं जिस त्याग-तपस्या से यह व्रत रखती हैं, वह बेहद अनुपम है। यह कठिन व्रत है। इस व्रत में फलाहार का सेवन तो दूर, सुहागिनें जल तक का सेवन नहीं करती हैं। व्रत के दूसरे दिन स्नान-पूजन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
ऐसे करें पूजा
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, सुहागिनें सूर्योदय से पूर्व उठकर सरगी ग्रहण करें। स्नान के बाद शिव परिवार सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजन करें। दिनभर निर्जल व्रत रहते हुए शाम को पुन: स्नान कर सोलह शृंगार करें। पूजन के लिए केले के पत्ते से मंडप बनाकर उसमें गौरी-शंकर और गणेशजी की मूर्ति या चित्रमयी प्रतिमा स्थापित करके पूजन करें। शिव के लिए नैवेद्य के साथ वस्त्र व माता पार्वती के लिए भोग पदार्थों के अतिरिक्त सुहाग की वस्तु अर्पित करें। शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनें। अगले दिन ब्राह्मणों को दान पुण्य कर व्रत का पारण करें।