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Gorakhpur News: तनाव से बचने को लिया फोन का सहारा...अनिद्रा ने बढ़ा दी बेचैनी

Fri, 15 Mar 2024 04:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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- विश्व निद्रा दिवस पर विशेष
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- नींद पूरी नहीं होने पर हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक, डायबिटीज, हाई बीपी का भी रहता है खतरा
- स्लीप हाइजीन फॉलो कर बच सकते है अनिद्रा की बीमारी से


संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। स्वस्थ रहने के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है। लेकिन, बदलती दिनचर्या और तनाव के कारण नींद ही नहीं आ रही है। डिजिटल युग में देर रात तक मोबाइल फोन के उपयोग से नींद पूरी नहीं होती। इस कारण अगले दिन का काम प्रभावित होता है। काम प्रभावित होने से तनाव बढ़ता है, जिसके चलते भी नींद नहीं आती। इस अनिद्रा के चलते लोगों में हार्माेंस अनियंत्रित हो रहे हैं, जिसके चलते मधुमेह और रक्तचाप की समस्या भी बढ़ रही है। डॉक्टरों का सुझाव है कि इससे निपटने का एक ही उपाय है कि रात में सारे काम छोड़कर सात से आठ घंटे की भरपूर नींद लें।
अस्पतालों में प्रतिदिन आने वाले 100 में से 10 लोग नींद नहीं आने की समस्या के कारण परेशान होते हैं। अकेले जिला अस्पताल में ही पिछले साल करीब 1500 से ज्यादा लोग नींद पूरी नहीं होने की समस्या के कारण इलाज कराने आए थे। चिंताजनक यह है कि अनिद्रा की बीमारी के चलते आए लोगों की उम्र 19 से 50 साल के बीच है। इनकी काउंसिलिंग के दौरान यह बात सामने आई कि अधिकतर लोगों ने देर रात तक फोन पर बात करने, वीडियाे देखने या फिर सोशल साइट्स के उपयोग में समय बिताया। जिस कारण नींद नहीं आने की समस्या की शुरुआत हुई।
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डॉक्टरों के अनुसार प्राइमरी इनसोंनिया नींद ना आने की समस्या का पहला स्टेप होता है, जिसे लोग कम ही समझ पाते हैं। इसमें तनाव और अनियमित जीवन शैली आते हैं। इसे ब्रीथिंग एक्सरसाइज और योगाभ्यास कर काबू किया जा सकता है। इसके अलावा डिप्रेशन भी अनिद्रा का एक सबसे बड़ा कारण है।
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अनिद्रा से बढ़ता है रक्तचाप
अच्छी सेहत के लिए नींद का प्रबंधन जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति को सात से आठ घंटे की पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। अगर नींद पूरी नहीं होती है तो उससे पूरे दिन चिड़चिड़ापन रहता है। इस वजह से दूसरे काम प्रभावित होते हैं। इससे बढ़े तनाव की वजह से मधुमेह और रक्तचाप की दिक्कत आती है। इस तरह देखा जाए तो स्वास्थ्य विकार नींद पर निर्भर है।
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इन दिनों अनिद्रा की जितनी शिकायतें आती हैं, उनमें से अधिकांश देर रात तक मोबाइन फोन के उपयोग के कारण होती हैं। नींद पूरी नहीं होगी तो हमारी कार्यक्षमता और स्वास्थ्य दिन-ब-दिन प्रभावित होता है। आगे चलकर यही समस्या तनाव और डिप्रेशन का भी रूप ले लेता है। इससे बचने के लिए खुद को संयमित रखते हुए अच्छी नींद लेना ही एकमात्र विकल्प है।
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डाॅ. अमित शाही, मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक

कोट

नींद न आना सामान्य समस्या नहीं है। पहले यह समस्या बुजुर्गों में ही देखी जाती थी। लेकिन आजकल युवा भी इससे परेशान हैं। इसकी वजह बदलती दिनचर्या और मोबाइल है। रात में सोने से पहले अपने गैजेट्स को दूर रखें और खुद को सारी चिंताओं से मुक्त करें। अन्यथा यह आपके ही भविष्य के लिए खतरनाक है।
रमेंद्र त्रिपाठी, मनोवैज्ञानिक
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स्लिप हाइजीन को फॉलों करे-
-जब नींद आए तभी बिस्तर पर जाएं।
- आवाज वाली घड़ी कमरे में ना लगाएं
- सुबह जल्द उठने का समय फिक्स करें।
- 45 वर्ष के कम उम्र के लोग दिन में ना सोएं।
- सोने का कमरा, बेड साफ सुथरा रखें।
- सोने से एक घंटा पहले मोबाइल फोन बंद कर दें।
- रात में बहुत अधिक मसालेदार खाना न खाएं।
- सोने से पहले किसी से बहस या नकारात्मक बातें न करें।
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