जातिगत समीकरण को आधार बनाकर कायस्थ समाज इस बार बहुत उत्साहित है। इस बिरादरी के लोगों का कहना है कि विधायक व मेयर के चुनाव में समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। इस बार सीट सामान्य है और जातीय समीकरण को देखें तो हम करीब 20 फीसदी हैं। उधर, निषाद समाज का भी जातीय आधार पर दावा है। जो दस नए वार्ड बने हैं उनमें पांच वार्ड में तो निषाद समाज की बहुलता है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीतिक विश्लेषक एवं सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि गोरखपुर की जनता बहुत जागरूक है और मिजाज भी दूसरे जगहों से अलग है। सभी राजनीतिक दलों को नकार कर यहां की जनता ने किन्नर अमरनाथ यादव को चुना था। निकाय चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव है। ऐसे में राजनीतिक दल जातिगत आधार पर मजबूत प्रत्याशी उतारने के साथ ही अन्य जातियों में अपने परंपरागत वोटों को भी साधने की कोशिश करेंगे। सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर चुनाव नहीं जीता जा सकता है, इसके साथ विचारधारा भी मिलना जरूरी है।
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मतदाताओं की संख्या
वैश्य : 20-22 फीसदी
कायस्थ : 18 से 20 फीसदी
अल्पसंख्यक : 25 से 27 फीसदी
ब्राह्मण : 10 से 14 फीसदी
निषाद : 10 फीसदी
अनुसूचित जाति : 5 से 7 फीसदी
यादव : 5 से 7 फीसदी
पासवान : 5 फीसदी
क्षत्रिय : 5 फीसदी
नोट : ये आंकड़ें राजनीतिक दलों के हैं।
भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय ने कहा कि मेयर और वार्ड के प्रत्याशियों के चयन में कई बिंदुओं का ख्याल रखा जाएगा। पहला तो वह पार्टी का कार्यकर्ता हो और सामाजिक स्तर पर उसकी पहचान होनी चाहिए। मेयर के लिए सामान्य सीट होने के चलते जातीय समीकरण भी एक अहम पहलू है। लोकसभा चुनाव भी आने वाला है, उसे भी ध्यान में रखना है कि संतुलन बना रहे। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में सभी पैमानों पर प्रत्याशियों को परखा जाएगा। उसके बाद सूचिबद्ध करके उसे प्रदेश कार्यालय भेज दिया जाएगा।
सपा जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम ने कहा कि हमारी पार्टी की मेयर पद की प्रत्याशी काजल निषाद होंगी। वहीं, वार्ड प्रत्याशियों के चयन में सामाजिक, जातीय पहलू को भी देखा गया। जिले स्तर पर स्क्रीनिंग कर नाम शीर्ष नेतृत्व को भेज दिए गए हैं। अंतिम निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर से होना है। स्क्रीनिंग के बाद मेयर के लिए पांच नाम भेजे गए थे। वहीं पार्षद पद के लिए दो-दो नाम भेजे गए हैं। इसी तरह नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए भी दो-दो नाम भेजे गए हैं। टिकट के लिए चयन का आधार राष्ट्रीय अध्यक्ष का ही होगा।
बसपा जिलाध्यक्ष जीतेंद्र कुमार नीरज ने कहा कि प्रत्याशियों के चयन में मजबूत और जिताऊ के साथ जातिगत समीकरण का पूरा ख्याल रखा गया है। शहर में जिस बिरादरी की संख्या ज्यादा होती है उसका दबाव ज्यादा होता है। लेकिन, परंपरागत वोटरों को ध्यान में रखकर ही चयन किया जाता है। मेयर पद के लिए अभी चार नाम सामने आए हैं, जो पार्टी मुख्यालय भेज दिए गए हैं। ब्राह्मण समाज, निषाद बिरादरी और मुस्लिम समाज के एक-एक बड़े नेताओं का नाम पार्टी के आला कमान को भेजा गया है।
कांग्रेस की जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने कहा कि मेयर के प्रत्याशी के चयन में कई तरह के समीकरण देखे जा रहे हैं। उम्मीदवार का दमखम, जाति की बहुलता और उसकी लोकप्रियता पर खास फोकस किया गया है। इन्हीं सब पहलुओं को ध्यान में रखकर पांच संभावित प्रत्याशियों का चयन कर शीर्ष नेतृत्व को भेजा गया है। इसी तरह वार्ड के प्रत्याशियों का भी चयन उनके वार्ड की परिस्थितियों को देखकर ही किया जाएगा। शहर के मेयर पद पर कांग्रेस का भी कब्जा रहा है। पवन बथवाल शहर के पहले मेयर बने थे। हमारी कोशिश है कि मजबूत प्रत्याशी उतारें ताकि फिर से कब्जा हो सके।